पीयूष गोयल ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले पर जताई संतोष, तमिलनाडु सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस निर्णय पर खुशी व्यक्त की, जिसमें तिरुप्परनकुंड्रम मंदिर के दीप प्रज्ज्वलन से संबंधित न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन के आदेश को बरकरार रखा गया। उन्होंने तमिलनाडु सरकार पर सनातन धर्म का अपमान करने और उस पर हमले का आरोप लगाया।
गोयल ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सितंबर 2023 में सनातन धर्म को समाप्त करने की एक निंदनीय मांग की थी। इसके कुछ समय बाद ही तिरुप्परनकुंड्रम पर्वत पर भगवान कार्तिकेय और भगवान मुरुगन से जुड़े दीप प्रज्ज्वलन पर रोक लगा दी गई।
उदयनिधि स्टालिन की विवादास्पद टिप्पणी
गोयल ने यह भी कहा कि यह महज संयोग नहीं है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन और डीएमके के अन्य नेता लगातार सनातन धर्म की आलोचना कर रहे हैं। 2 सितंबर 2023 को उदयनिधि ने सनातन धर्म के उन्मूलन की मांग की, और उसके कुछ महीनों बाद तिरुप्परनकुंड्रम पर्वत पर दीप जलाने पर रोक लगा दी गई।
तमिलनाडु उच्च न्यायालय का निर्णय
गोयल ने कहा कि यह अत्यंत संतोषजनक है कि तमिलनाडु उच्च न्यायालय ने तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ियों पर स्थित इस प्राचीन मंदिर के भक्तों को न्याय प्रदान किया है, जहां भगवान मुरुगन विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से भगवान कार्तिकेय के सम्मान में दीप जलाए जाते रहे हैं और यह परंपरा हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है। इस वर्ष, 4 दिसंबर, 2025 को दीप जलाने की योजना थी।
राज्य सरकार की भूमिका
गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि इस संयोग को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि राज्य सरकार ने 2024 में भी इन परंपराओं का पालन करने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं ने तमिलनाडु सरकार के निर्णय के खिलाफ अदालत का रुख किया, जिसके परिणामस्वरूप 1 दिसंबर, 2025 को न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने दीप जलाने की प्रथा को जारी रखने की अनुमति दी।
