पीएम मोदी का सोने की खरीद पर सुझाव और भारत का बढ़ता गोल्ड रिजर्व

प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच नागरिकों से अगले एक वर्ष तक सोने की खरीद से बचने का अनुरोध किया है। इस समय, भारत का गोल्ड रिजर्व तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें आरबीआई ने पिछले छह महीनों में 104.2 टन सोना जोड़ा है। अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भी अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं। जानें, क्यों देश अपने सोने को अपने नियंत्रण में रखना चाह रहे हैं और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
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सोने की खरीद पर पीएम मोदी का आग्रह

मिडिल ईस्ट संकट के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अगले एक वर्ष तक सोने की खरीद से दूर रहें। हालांकि, दूसरी ओर, सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना खरीदने में सक्रिय है।


पीएम मोदी का सोने की खरीद पर सुझाव और भारत का बढ़ता गोल्ड रिजर्व


पिछले छह महीनों में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का सोने का भंडार 104.2 टन बढ़ा है। पिछले तीन वर्षों में, आरबीआई ने कुल 280 टन सोना जमा किया है, जिससे वर्तमान में भारत के पास 880 टन का गोल्ड रिजर्व है।


केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भी इस अवधि में अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं। पड़ोसी चीन, यूरोपीय देश, ब्राजील और पोलैंड जैसे राष्ट्र भी अपने गोल्ड रिजर्व में वृद्धि कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, बैंक ऑफ फ्रांस ने न्यूयॉर्क स्थित फेडरल रिजर्व से 129 टन सोना वापस लिया है, जिससे अब फ्रांस का कुल सोना लगभग 2,437 टन हो गया है।


यह कदम फ्रांस के लिए अपने सोने को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।


क्यों कर रहे हैं देश ऐसा?


दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध के आरंभ में अमेरिका ने रूस के 300 अरब डॉलर के विदेशी रिजर्व के उपयोग पर रोक लगा दी थी, जिससे यूरोपीय देशों में जमा राशि को फ्रीज कर दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि देशों का डॉलर पर विश्वास कम हुआ और सोने की खरीद में वृद्धि हुई। इसके साथ ही, जो सोना देशों ने विदेशी बैंकों में सुरक्षा के लिए रखा था, उसे अपने देश में रखने की इच्छा बढ़ी ताकि संकट के समय में सोने को बेचकर आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।


पहले भारत भी अपना सोना विदेशी बैंकों में रखता था, लेकिन अब उसने इसे अपने देश में रखना शुरू कर दिया है। 2023 में, आरबीआई का 38 प्रतिशत सोना देश में था, जो अब बढ़कर 77 प्रतिशत हो गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसे संकट के समय में गोल्ड रिजर्व से सुरक्षा सुनिश्चित होती है। अपने सोने का देश में होना, दूसरे देशों पर निर्भरता को भी कम करता है।