पासपोर्ट और नागरिकता: विदेश मंत्रालय का नया स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय ने हाल ही में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं मानने की घोषणा की है, जिससे नागरिकता के सही प्रमाण को लेकर बहस छिड़ गई है। यह मुद्दा जटिल है और केंद्र सरकार ने अभी तक कोई स्पष्टता नहीं दी है। जानें नागरिकता कानूनों के अनुसार पासपोर्ट की भूमिका और नागरिकता के प्रमाण के बारे में। इस लेख में पासपोर्ट सेवा में सुधार और नागरिकता के नियमों पर भी चर्चा की गई है।
| Jun 24, 2026, 20:06 IST
पासपोर्ट की भूमिका और नागरिकता का प्रमाण
भारतीय नागरिकों को ही पासपोर्ट जारी किया जाता है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। यह जानकारी 14वें 'पासपोर्ट सेवा दिवस' के अवसर पर दी गई। इस घोषणा के बाद, सोशल मीडिया पर नागरिकता के प्रमाण को लेकर बहस छिड़ गई है। यह एक जटिल मुद्दा है जिस पर केंद्र सरकार ने अभी तक कोई स्पष्टता नहीं दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि पासपोर्ट मुख्यतः यात्रा के लिए होता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए जारी किया जाता है। इसका अर्थ है कि केवल पासपोर्ट होने से नागरिकता की पुष्टि नहीं होती है।
नागरिकता कानून और पासपोर्ट
यह स्थिति एक विरोधाभास को दर्शाती है, क्योंकि जो लोग नागरिक नहीं हैं, उन्हें पासपोर्ट नहीं दिया जाता। इंडिया टुडे ग्रुप के कंसल्टिंग एडिटर बीवी राव ने इस विषय को स्पष्ट किया है। पासपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि यह आपकी संपत्ति है; इसके पिछले हिस्से पर लिखा होता है कि यह "भारत सरकार की संपत्ति" है और इसे सरकार के आदेश पर वापस करना होगा। इस साल की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह केवल पहचान का दस्तावेज़ है। वोटर ID कार्ड भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता है, यह मुख्यतः पहचान और पते का दस्तावेज़ है।
नागरिकता कानूनों का विवरण
नागरिकता कानूनों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का जन्म 26 जनवरी 1950 के बाद, लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, तो वह जन्म से भारतीय नागरिक माना जाएगा। वहीं, यदि किसी का जन्म जुलाई 1987 के बाद हुआ है, तो वह नागरिकता का दावा तब कर सकता है जब उसके माता-पिता में से कोई एक नागरिक हो। 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे लोग नागरिकता का दावा तभी कर सकते हैं जब उनके माता-पिता दोनों भारतीय हों या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। विदेश मंत्रालय ने भारत के पासपोर्ट सर्विस नेटवर्क के विस्तार और चिप-इनेबल्ड ई-पासपोर्ट की सफल शुरुआत का भी उल्लेख किया।
पासपोर्ट सेवा में सुधार
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें से 1.39 करोड़ पासपोर्ट थे। इसके अलावा, पासपोर्ट बनने में लगने वाले औसत समय में भी सुधार हुआ है; पुलिस वेरिफिकेशन के समय को छोड़कर, अब पासपोर्ट छह कार्यदिवसों के भीतर मिल जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर नागरिकों को औसतन 45 मिनट से कम समय बिताना पड़ता है।
