पालघर में सड़क दुर्घटना में शिक्षिका के परिवार को 51.65 लाख रुपये का मुआवजा
दुर्घटना का विवरण और न्यायाधिकरण का आदेश
पालघर, 27 जुलाई: महाराष्ट्र के पालघर में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 2017 में हुई एक सड़क दुर्घटना में मारी गई 53 वर्षीय शिक्षिका के परिवार को 51.65 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया है। यह घटना तब हुई जब शिक्षिका के पति कार चला रहे थे, और उनकी गाड़ी को एक ट्रक ने टक्कर मार दी, जिससे शिक्षिका की मृत्यु हो गई।
ट्रक की बीमा कंपनी ने यह तर्क दिया कि दुर्घटना में शिक्षिका के पति की भी लापरवाही थी, इसलिए मुआवजे की राशि को कम किया जाना चाहिए। बीमा कंपनी ने यह भी कहा कि शिक्षिका की आय का आकलन उनकी सेवानिवृत्ति तक बचे पांच वर्षों के वेतन के आधार पर किया जाना चाहिए। हालांकि, एमएसीटी के सदस्य ए.आर. रहाणे ने 17 जुलाई को दिए गए आदेश में पूर्व के न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया।
दुर्घटना की गंभीरता और पीड़ित परिवार का संघर्ष
इस आदेश की एक प्रति रविवार को जारी की गई। शिक्षिका सुधा विजयकुमार चोपड़ा 31 दिसंबर 2017 को अपने पति विजयकुमार श्यामकुमार चोपड़ा (60) के साथ कार से वापी से मुंबई लौट रही थीं। इसी दौरान, मुंबई-अहमदाबाद राजमार्ग पर हलोली गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार के पिछले हिस्से में टक्कर मार दी।
यह टक्कर इतनी भयंकर थी कि कार सड़क के डिवाइडर से टकराकर पलट गई और तीन से चार बार पलटते हुए सड़क के दूसरी ओर जा गिरी। इस दुर्घटना में सुधा चोपड़ा की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि उनके पति और बेटे को गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के बाद, उनके पति और 31 वर्षीय बेटे ऋषभ ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) का सहारा लिया।
ऋषभ इस हादसे के कारण लकवाग्रस्त हो गए थे। न्यायाधिकरण ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित करे कि विजयकुमार की भी कोई लापरवाही थी या दुर्घटना किसी अन्य कारण से हुई थी। न्यायाधिकरण ने जोधपुर निवासी ट्रक के मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से 51,65,600 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया और याचिका दायर करने की तारीख (तीन मार्च 2018) से लेकर भुगतान करने की तारीख तक इस राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से भुगतान का निर्देश दिया।
