पार्ले मेलोडी: पीएम मोदी ने दिया टॉफी को वैश्विक पहचान

पार्ले मेलोडी टॉफी को हाल ही में पीएम मोदी द्वारा इटली की पीएम को भेंट किया गया, जिससे यह टॉफी वैश्विक स्तर पर चर्चित हो गई। पार्ले की कहानी, इसकी शुरुआत और महत्व को जानें। यह टॉफी न केवल भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि इसे एक अनूठा वैश्विक मंच भी मिला है। जानें कैसे पार्ले-जी बिस्किट ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान लोगों की मदद की और कैसे यह टॉफी अब एक नई पहचान बना रही है।
 | 
पार्ले मेलोडी: पीएम मोदी ने दिया टॉफी को वैश्विक पहचान gyanhigyan

पार्ले का नाम फिर से चर्चा में

नई दिल्ली: एक समय था जब मुंबई के विले पार्ले ईस्ट में स्थित एक प्रसिद्ध फैक्टरी से पार्ले-जी बिस्किट की खुशबू आस-पड़ोस में फैलती थी। यह फैक्टरी अब बंद हो चुकी है, लेकिन पार्ले का नाम आज भी जीवित है। हाल ही में, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को पार्ले मेलोडी टॉफियों का एक पैकेट भेंट किया, तो यह नाम पूरी दुनिया में फिर से सुर्खियों में आ गया। पीएम ने मजाक में मेलोनी के वायरल निकनेम का जिक्र किया, जिससे यह टॉफी और भी चर्चित हो गई।


पार्ले मेलोडी: पीएम मोदी ने दिया टॉफी को वैश्विक पहचान
शाहरुख खान 15 करोड़ लेते हैं, रोनाल्डो 20 करोड़, मोदी ने पार्ले मेलोडी के लिए मुफ्त में किया प्रचार


पार्ले मेलोडी को मिला वैश्विक मंच
कूटनीतिक इस क्षण में, इस भारतीय टॉफी को एक ऐसा वैश्विक मंच मिला, जिसकी मार्केटिंग पैसे से नहीं खरीदी जा सकती। यह अवसर उन दो राष्ट्राध्यक्षों के कारण संभव हुआ, जिनके सोशल मीडिया पर 210 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं।


पार्ले की कहानी
पार्ले की कहानी एक तरह से 'चार्ली एंड द चॉकलेट फैक्ट्री' के देसी संस्करण जैसी है। इसकी शुरुआत बहुत साधारण तरीके से हुई थी, जिसमें पार्ले-जी ग्लूकोज बिस्किट का 'गोल्डन टिकट' था।


1929 में, मोहनलाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले में इस कंपनी की स्थापना की। शुरुआत में यह टॉफियों का उत्पादन करती थी, लेकिन बाद में पार्ले ग्‍लूको लॉन्च किया, जो 1939 में पार्ले-जी बन गया। यह कंपनी बिस्किट और टॉफियों के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम बन गई।


व्यापार का विभाजन
1970 के दशक में, चौहान परिवार ने अपने व्यवसाय को विभिन्न डिवीजनों में बांट दिया, जिससे तीन स्वतंत्र कंपनियां बनीं। इनमें से पहली कंपनी पार्ले प्रोडक्ट्स है, जो बिस्किट और टॉफियों की एक बड़ी निर्माता है। यह मेलोडी टॉफियां भी बनाती है और पार्ले-जी के अलावा मोनैको, क्रैकजैक और हाइड एंड सीक जैसे लोकप्रिय बिस्किट भी बनाती है।


पार्ले-जी बिस्किट इतने प्रसिद्ध हैं कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान ये लोगों के लिए जीवनयापन का एक महत्वपूर्ण साधन बन गए। इसकी कम कीमत और लंबी शेल्फ लाइफ ने इसे घरों में रखने के लिए एक बेहतरीन विकल्प बना दिया। प्रवासी मजदूरों ने अपनी लंबी यात्राओं के दौरान इस पर भरोसा किया, और राहत कार्य के दौरान इसके लाखों पैकेट बांटे गए।



मेलोडी को मिला मुफ्त प्रचार
आज, मेलोडी की मालिक कंपनी पार्ले प्रोडक्ट्स को इससे बेहतर प्रचार का अवसर नहीं मिल सकता था। जब इन्फ्लुएंसर और फिल्मी सितारे एंडोर्समेंट के लिए करोड़ों रुपये लेते हैं, तब दो विश्व नेता ने इस टॉफी को मुफ्त में सुर्खियों में ला दिया है। पार्ले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने कहा कि यह भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने का एक शानदार तरीका था और उन्होंने इस प्रचार के लिए आभार व्यक्त किया।