पाकिस्तान में आर्थिक संकट: लोड शेडिंग और सैलरी कटौती का सामना

पाकिस्तान में आर्थिक संकट ने गंभीर रूप ले लिया है, जिससे लोड शेडिंग और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती हो रही है। IMF की शर्तों के चलते देश की स्थिति और बिगड़ती जा रही है। कराची, लाहौर और अन्य शहरों में बिजली की कटौती से आम जनता परेशान है। क्या पाकिस्तान इस संकट से उबर पाएगा? जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
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पाकिस्तान में आर्थिक संकट: लोड शेडिंग और सैलरी कटौती का सामना

पाकिस्तान का आर्थिक संकट गहराता


पाकिस्तान में आर्थिक स्थिति अब गंभीर हो चुकी है। आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर IMF की किस्त चुकाने का भारी दबाव है, जिसके चलते सरकार ने कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में सरकारी और राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों के कर्मचारियों की सैलरी में 5 से 30 प्रतिशत की कटौती को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, ईंधन पर सख्त नियंत्रण लागू किया गया है, सरकारी वाहनों की संख्या में 60 प्रतिशत की कमी की गई है, और मंत्रियों तथा विधायकों के भत्तों में भी भारी कटौती की गई है। इन उपायों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिससे देश एक बार फिर 'लालटेन युग' में लौटता दिख रहा है।


IMF की शर्तें और आर्थिक दबाव

पाकिस्तान ने IMF से 7 बिलियन डॉलर की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) के तहत सहायता प्राप्त की है, लेकिन इसके लिए कई कठोर शर्तें लागू की गई हैं। इनमें टैक्स संग्रह बढ़ाना, पावर सेक्टर में सुधार करना, सब्सिडी में कमी लाना, और सरकारी खर्चों में कटौती शामिल हैं। हाल के दिनों में IMF के रिव्यू मिशन के साथ बातचीत में पाकिस्तान को और भी कड़े लक्ष्य दिए गए हैं, जिसमें सैलरी कट और ईंधन पर नियंत्रण जैसे उपाय शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोनों IMF से आने वाली अगली किस्त पर निर्भर हैं, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था संकट में है।


लोड शेडिंग का संकट

IMF की शर्तों के कारण पावर सेक्टर में सुधार न होने से लोड शेडिंग फिर से शुरू हो गई है। कराची, लाहौर, पेशावर, क्वेटा और ग्रामीण क्षेत्रों में 6 से 12 घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है। K-Electric और IESCO जैसे डिस्को ने मार्च 2026 में कई फीडरों पर शेड्यूल्ड और अनशेड्यूल्ड शटडाउन की घोषणा की है। सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में 12-24 घंटे की लोड शेडिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं। लोग गर्मियों से पहले ही सर्दियों में बिजली कटौती के कारण जीवन यापन में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।


जनता की प्रतिक्रिया और राजनीतिक स्थिति

सैलरी कट से लाखों सरकारी कर्मचारी और SOE वर्कर्स प्रभावित हुए हैं। फ्यूल अलाउंस खत्म होने से सरकारी अधिकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आम जनता का कहना है, "IMF की किस्त चुकाने के चक्कर में देश को अंधेरे में धकेल दिया गया है।" सोशल मीडिया पर #LanternYug और #LoadSheddingPakistan ट्रेंड कर रहे हैं। विपक्षी नेता इमरान खान के समर्थक इसे आसिम मुनीर की 'पावर कंसॉलिडेशन' की विफलता बता रहे हैं। सरकार का दावा है कि ये अस्थायी उपाय हैं और IMF से मिलने वाली मदद से अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।


भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि IMF की अगली किस्त समय पर नहीं आई या पावर सेक्टर में सुधार नहीं हुए, तो लोड शेडिंग और बढ़ सकती है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब IMF, चीन और गल्फ देशों के कर्ज पर निर्भर है। आसिम मुनीर पर बढ़ता दबाव है, क्योंकि आर्मी की छवि भी इससे जुड़ी हुई है। जनता उम्मीद कर रही है कि जल्द ही कोई राहत मिले, अन्यथा 'लालटेन युग' लंबा खिंच सकता है।