पाकिस्तान के सुरों में बदलाव: भारत के साथ बातचीत की पेशकश

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत के साथ बातचीत की पेशकश की है, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद की स्थिति को दर्शाता है। इस लेख में जानें कि कैसे पाकिस्तान की रणनीति में बदलाव आया है और इसके पीछे के कारण क्या हैं। इसके अलावा, भारत-पाक के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौतों का भी उल्लेख किया गया है।
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पाकिस्तान के सुरों में बदलाव: भारत के साथ बातचीत की पेशकश

पाकिस्तान की नई रणनीति

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान की स्थिति में noticeable बदलाव आया है। कभी वह भारत को धमकाता है, तो कभी बातचीत की पेशकश करता है। हाल ही में, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि वे भारत के साथ संवाद के लिए तैयार हैं। यह सभी को ज्ञात है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। अब वह बैकफुट पर है और समझ चुका है कि भारत की प्रतिक्रिया अब पहले से अलग है। पाकिस्तान के कई नेता हाल के दिनों में बातचीत की आवश्यकता पर जोर देते नजर आए हैं।


पाकिस्तान की कथनी और करनी

पाकिस्तान की कथनी और करनी में अंतर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंच पर कहा है कि वे भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन भारत ने जब भी पाकिस्तान पर भरोसा किया, उसे धोखा ही मिला। पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की कोशिशें अक्सर विफल होती हैं, क्योंकि वहां की सेना सरकार को नियंत्रित करती है। हालांकि पाक जनता भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहती है, लेकिन सेना और आतंकवादियों की मौजूदगी हमेशा एक बाधा बनी रहेगी।


भारत-पाक के बीच महत्वपूर्ण समझौते

भारत-पाक के बीच हुए कुछ प्रमुख समझौते

जिन्ना- माउंटबेटन वार्ता (1947): कश्मीर मुद्दे पर मुहम्मद अली जिन्ना और लुइस माउंटबेटन के बीच वार्ता।
कराची समझौता (1949): 27 जुलाई, 1949 को सीजफायर समझौता।
लियाकत-नेहरू समझौता (1950): शरणार्थी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर समझौता।
सिंधु जल-संधि (1960): सिंधु नदी के जल बंटवारे पर समझौता।
ताशकंद समझौता (1966): 1965 के युद्ध के बाद शांति समझौता।
शिमला समझौता (1972): बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद विवादों को समाप्त करने के लिए सहमति।
दिल्ली समझौता (1973): भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच समझौता।
इसलामाबाद समझौता (1988): नॉन-न्यूक्लियर एग्रीमेंट पर समझौता।