पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी द्वारा नाबालिगों का जासूसी में इस्तेमाल: एक गंभीर चेतावनी
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का नया तरीका
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI), ने भारत में नाबालिगों को जासूसी के लिए इस्तेमाल करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पठानकोट में एक 15 वर्षीय किशोर की गिरफ्तारी ने यह उजागर किया है कि भावनात्मक कमजोरी और सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों को फंसाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, यह किशोर पिछले एक साल से संवेदनशील सैन्य जानकारियों को साझा कर रहा था। यह घटना भारत की डिजिटल और आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है.
जासूसी नेटवर्क का खुलासा
पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि किशोर पिछले एक साल से सैन्य ठिकानों और संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित जानकारी ISI के हैंडलरों को भेज रहा था। यह नेटवर्क इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया था कि यह सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सके। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी पता चला कि पंजाब के अन्य जिलों में भी कुछ नाबालिग इसी तरह के संपर्क में हैं, जिससे खतरे का दायरा और भी बड़ा हो सकता है.
नाबालिगों का चयन क्यों?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ISI जानबूझकर बच्चों का उपयोग करती है ताकि संदेह कम हो और ट्रैकिंग करना मुश्किल हो। पैसे, ऑनलाइन गेमिंग क्रेडिट, और मोबाइल रिचार्ज जैसे छोटे प्रलोभनों के माध्यम से भरोसा जीता जाता है। इस मामले में भी किशोर को इसी तरह धीरे-धीरे फंसाया गया, ताकि वह खुद को अपराधी नहीं बल्कि 'काम करने वाला' समझे.
व्यक्तिगत त्रासदी से कट्टरपंथी नेटवर्क तक
जांच में यह भी सामने आया कि किशोर के पिता की विदेश में मृत्यु ने उसे गहरे अवसाद में धकेल दिया था। पढ़ाई छूट गई, अकेलापन बढ़ा और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री से जुड़ाव हुआ। इसी भावनात्मक खालीपन का फायदा उठाकर ISI से जुड़े तत्वों ने संपर्क साधा और धीरे-धीरे उसे जासूसी नेटवर्क में शामिल कर लिया। यह कट्टरपंथी भर्ती का एक जाना-पहचाना पैटर्न है.
सोशल मीडिया का उपयोग
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया का उपयोग न केवल सूचनाएं प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था, बल्कि अन्य युवाओं को जोड़ने की कोशिश भी की जा रही थी। किशोर के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच से संपर्कों, चैट्स और वित्तीय ट्रेल की जांच की जा रही है। इस डिजिटल सबूत के माध्यम से नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
चेन तोड़ने की कोशिश
पंजाब पुलिस ने किशोर को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है। यह मामला दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि घरों के भीतर और मोबाइल स्क्रीन पर भी चुनौती का सामना कर रही है। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और डिजिटल साक्षरता अब सुरक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए, अन्यथा दुश्मन की यह रणनीति और गहरी पैठ बना सकती है.
