पाकिस्तान और तालिबान: पारंपरिक युद्ध की ताकत का विश्लेषण
पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ता तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान (तालिबान शासन) के बीच तनाव में वृद्धि हो रही है। हाल के सीमा विवादों के चलते एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है: पारंपरिक युद्ध में दोनों सेनाओं की ताकत में कितना अंतर है?
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सेना पारंपरिक युद्ध में अफगान तालिबान पर भारी पड़ती है। आइए आंकड़ों के माध्यम से इसे समझते हैं:
- सैनिकों की संख्या: पाकिस्तान के पास लगभग 6.6 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि तालिबान के पास केवल 1.65-1.72 लाख लड़ाके हैं। इस प्रकार, पाकिस्तान की ताकत तालिबान से लगभग चार गुना अधिक है।
- टैंक और बख्तरबंद वाहन: पाकिस्तान के पास 2677 टैंक और 59,000 से अधिक बख्तरबंद वाहन हैं, जबकि तालिबान के पास केवल 100-200 पुराने टैंक और कुछ हजार अमेरिकी Humvee हैं, जिनकी स्थिति खराब है।
- वायुसेना: पाकिस्तान के पास 1399 हवाई जहाज हैं, जिनमें 400 से अधिक आधुनिक फाइटर जेट (F-16, JF-17) शामिल हैं। दूसरी ओर, तालिबान के पास केवल 6-9 पुराने विमान और 23 हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें से अधिकांश उड़ान भरने के लिए अनुपयुक्त हैं।
- नौसेना: पाकिस्तान की एक मजबूत नौसेना है, जबकि तालिबान के पास कोई नौसेना नहीं है, क्योंकि अफगानिस्तान एक लैंडलॉक्ड देश है।
- अन्य: पाकिस्तान के पास आधुनिक ड्रोन, मिसाइल डिफेंस, न्यूक्लियर क्षमता और मजबूत लॉजिस्टिक्स हैं। तालिबान मुख्य रूप से पुराने अमेरिकी हथियारों पर निर्भर है, लेकिन उन्हें रखरखाव और गोला-बारूद की भारी कमी का सामना करना पड़ता है।
पारंपरिक युद्ध में संभावित परिणाम: रिपोर्ट के अनुसार, यदि खुला युद्ध होता है, तो पाकिस्तान 1-2 हफ्तों में अफगान आसमान पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है और हवाई हमलों के माध्यम से तालिबान को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। टैंक-टू-टैंक या एयर स्ट्राइक में तालिबान टिक नहीं पाएगा। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2026 में पाकिस्तान 14वें स्थान पर है, जबकि अफगानिस्तान 121वें स्थान पर है।
तालिबान की असली ताकत: तालिबान का जज्बा, धार्मिक प्रेरणा, पहाड़ी इलाकों में गोरिल्ला युद्ध की क्षमता और स्थानीय समर्थन उन्हें लंबे असिमेट्रिक युद्ध में मजबूत बनाता है। एलीट यूनिट जैसे Badri-313 और Red Unit कमांडो रेड कर सकते हैं। अमेरिका को 20 साल तक अफगानिस्तान में घसीटने वाले तालिबान पाकिस्तान को भी महंगा पड़ सकते हैं, खासकर यदि TTP (पाकिस्तानी तालिबान) से समर्थन मिले और युद्ध लंबा खिंचे।
निष्कर्ष: पारंपरिक युद्ध में पाकिस्तान स्पष्ट रूप से मजबूत है, लेकिन तालिबान हार नहीं मानेगा। वे जंगल युद्ध और छापेमारी के माध्यम से पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। दोनों देशों के बीच हाल के एयरस्ट्राइक और सीमा संघर्ष इस तनाव को और बढ़ा रहे हैं। क्या यह युद्ध की ओर बढ़ रहा है? वर्तमान में स्थिति नाजुक बनी हुई है।
