पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ममता को मिली नई याचिका दाखिल करने की अनुमति

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए वोटों और विधानसभा सीटों पर जीत के कम अंतर को लेकर ममता बनर्जी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं को नई याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दी गई है। चुनाव आयोग ने भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट में वोटर लिस्ट का मामला

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान हटाए गए वोटों और विधानसभा सीटों पर जीत के कम अंतर को लेकर एक नई कानूनी लड़ाई शुरू होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं को नई याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दे दी है।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ममता को मिली नई याचिका दाखिल करने की अनुमति

31 विधानसभा सीटों पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में यह दावा किया कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों से भी कम था जिन्हें पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया। इस दलील के बाद मामला और गंभीर हो गया।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि ऐसे विवादों के समाधान के लिए चुनाव याचिका ही सही कानूनी उपाय है। आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि वोट जोड़ने या हटाने से संबंधित मामलों में वह जिम्मेदार है और अपील की प्रक्रिया उपलब्ध है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नई याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दी। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे बंगाल की चुनावी राजनीति में वोटर लिस्ट और पारदर्शिता का मुद्दा फिर से गर्मा सकता है।