पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मू के कार्यक्रम पर विवाद गहराया
राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन अब एक गंभीर राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिसके बाद यह मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
राष्ट्रपति की नाराजगी
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जिस कार्यक्रम का उद्देश्य संताल समुदाय की संस्कृति का सम्मान करना था, उसमें कई सदस्य शामिल नहीं हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम का स्थान ऐसा चुना गया था, जहां पहुंचना कई लोगों के लिए कठिन था।
पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रपति की पीड़ा से देश के लोग दुखी हैं। उन्होंने इसे 'शर्मनाक और अभूतपूर्व' बताया और कहा कि राष्ट्रपति के पद की गरिमा का सम्मान होना चाहिए।
कार्यक्रम स्थल का विवाद
इस विवाद की शुरुआत कार्यक्रम स्थल के परिवर्तन से हुई। पहले इसे दार्जिलिंग में आयोजित किया जाना था, लेकिन बाद में इसे बागडोगरा के गोसाईंपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि यदि कार्यक्रम दार्जिलिंग में होता, तो अधिक लोग शामिल हो सकते थे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति
राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि उनके राज्य दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या कोई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित नहीं थे। आमतौर पर राष्ट्रपति के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री का होना आवश्यक होता है।
ममता बनर्जी का खंडन
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के स्वागत की सभी व्यवस्थाएं प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि सम्मेलन के आयोजकों की तैयारियां सही नहीं थीं, लेकिन राज्य प्रशासन ने कोई लापरवाही नहीं की।
केंद्र सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट राष्ट्रपति के दौरे से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं पर आधारित होगी।
राजनीतिक टकराव की स्थिति
इस विवाद के बाद केंद्र की भाजपा सरकार और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, जबकि ममता बनर्जी का आरोप है कि भाजपा राष्ट्रपति के पद को राजनीतिक विवाद में घसीट रही है।
