पश्चिम बंगाल में राज्यपाल का इस्तीफा: राजनीतिक हलचल का नया अध्याय

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के करीब, राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, इसे केंद्र सरकार की अलोकतांत्रिक कार्यशैली का हिस्सा बताया है। जयराम रमेश ने भी इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक स्थिति और भी जटिल हो गई है। क्या यह बदलाव चुनावों पर असर डालेगा? जानें पूरी कहानी।
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पश्चिम बंगाल में राज्यपाल का इस्तीफा: राजनीतिक हलचल का नया अध्याय

राज्यपाल का अचानक इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नजदीक, राज्य में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव ने हलचल मचा दी है। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने बृहस्पतिवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने गहरी हैरानी व्यक्त की है और केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि यह 'अलोकतांत्रिक कार्यशैली' का हिस्सा है।


कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ सप्ताह पहले राज्यपाल के इस्तीफे पर कांग्रेस ने आश्चर्य व्यक्त किया। पार्टी ने कहा कि पिछले वर्ष जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से 'बिना किसी कारण' हटाया गया था और उनके उत्तराधिकारी बोस के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया है। विपक्षी दल ने यह भी कहा कि अब आर एन रवि को पश्चिम बंगाल भेजा गया है, जिससे वहां 'रुकावटें' उत्पन्न होने की संभावना है।


जयराम रमेश का बयान

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, 'पहले जगदीप धनखड़ को 21 जुलाई 2025 को अचानक हटा दिया गया। आज कोलकाता के लोक भवन में उनके उत्तराधिकारी सी.वी. आनंद बोस के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया। आखिर ये क्या हो रहा है?' उन्होंने आगे कहा, 'आर एन रवि, मोदी की 'व्यवस्था' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि, उनकी कार्यशैली के कारण उन्हें नगालैंड से हटाया गया था। अब उन्हें पश्चिम बंगाल भेजा गया है, जहां वह निश्चित रूप से रुकावटें पैदा करेंगे।'