पश्चिम बंगाल में कुर्बानी पर विवाद: हुमायूं कबीर का बयान
पश्चिम बंगाल में आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने कुर्बानी की धार्मिक प्रथा को लेकर सरकार के हालिया नोटिस को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस परंपरा को जारी रखेगा, भले ही सरकार गोमांस के सेवन को नियंत्रित करे। कबीर के इस बयान के साथ-साथ फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी और इकबाल अंसारी ने भी गायों के सम्मान और राष्ट्रीय पशु के रूप में गाय की पहचान की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
| May 21, 2026, 16:54 IST
कुर्बानी की धार्मिक प्रथा पर हुमायूं कबीर का बयान
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के नेता हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत जारी किए गए हालिया नोटिस को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय धार्मिक नियमों के बावजूद कुर्बानी की रस्म को जारी रखेगा। 21 मई, 2026 को एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कबीर ने स्पष्ट किया कि सरकार गोमांस के सेवन को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन धार्मिक बलिदान की प्रथा में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उनका कहना था कि सरकार मुसलमानों को गोमांस न खाने का नियम बना सकती है, लेकिन कुर्बानी जारी रहेगी। हम किसी भी आपत्ति पर ध्यान नहीं देंगे।
धार्मिक परंपरा का महत्व
कबीर ने इस प्रथा के दीर्घकालिक धार्मिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह परंपरा 1400 वर्षों से चली आ रही है और जब तक दुनिया रहेगी, यह जारी रहेगी। इस परिप्रेक्ष्य में, फुरफुरा शरीफ के पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने गोमांस से संबंधित नीतियों में असंगति पर सवाल उठाया। उन्होंने घरेलू प्रतिबंधों की तुलना अंतरराष्ट्रीय गोमांस निर्यात से करते हुए कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए। गायों की हत्या पर रोक लगाना ठीक है, लेकिन भारत में गोमांस निर्यात में दूसरे नंबर पर होना क्या उचित है? एक आम आदमी कुर्बानी देता है, यह सही नहीं है।
सिद्दीकी ने विभिन्न राज्यों के नियमों के बजाय एक समान राष्ट्रीय नीति की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत के हर राज्य में गोमांस बिकता है, तो फिर यह असंगत क्यों है? कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। इसके विपरीत, बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने मुस्लिम समुदाय से गायों का सम्मान करने का आग्रह किया और केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की अपील की।
गाय के सम्मान की आवश्यकता
22 मई को एक समाचार एजेंसी को संबोधित करते हुए अंसारी ने भारत में गायों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम भारतीय मुसलमान हैं, और गाय को ‘गौमाता’ कहा जाता है, इसलिए मुसलमानों को गायों का सम्मान करना चाहिए। सरकार को इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए। उन्होंने गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की वकालत करते हुए कहा कि गाय की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। हिंदू धर्म में इसकी पूजा की जाती है, और लोगों को गाय का सम्मान करना चाहिए। यदि हिंदू इसका सम्मान करते हैं, तो गौबलि की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
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