पश्चिम बंगाल चुनाव में वोटर लिस्ट विवाद: TMC और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप
वोटर लिस्ट से नाम कटने का विवाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इसे एक साजिश मानती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि यह घुसपैठियों को बाहर निकालने का प्रयास है। इस बीच, मालदा में वोटर लिस्ट से नाम कटने के कारण नाराज लोगों ने अधिकारियों का घेराव किया और हाइवे को अवरुद्ध कर दिया। बीजेपी ने इस स्थिति के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। TMC का कहना है कि वे इस घेराव का समर्थन नहीं करते, बल्कि बीजेपी और चुनाव आयोग के लोग ही जनता को भड़काने का काम कर रहे हैं।
घटना का विवरण
यह घटना मालदा जिले के कलियाचक ब्लॉक में हुई। बुधवार को 7 न्यायिक अधिकारियों ने मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन करने के लिए दौरा किया, जिसमें 4 महिला अधिकारी भी शामिल थीं। जिन लोगों के नाम कट गए थे, उनकी शिकायतों पर बीडीओ ऑफिस में सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान, स्थानीय लोगों ने अधिकारियों का घेराव कर लिया। लगभग 8 घंटे तक ये अधिकारी वहीं फंसे रहे, अंततः पुलिस को बुलाना पड़ा।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव
स्थानीय मीडिया के अनुसार, जब अधिकारियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा था, तब पुलिस की गाड़ी पर पथराव किया गया और नेशनल हाइवे 12 को अवरुद्ध कर दिया गया। अधिकारियों को बचाने के लिए मालदा के एसपी अनुपम सिंह मौके पर पहुंचे। मालदा प्रशासन के अनुसार, यह प्रदर्शन पहले सुजापुर क्षेत्र में शुरू हुआ और धीरे-धीरे जलालपुर, मोथाबारी, जोदूपुर और कलियाचक में फैल गया।
स्थानीय लोगों की नाराजगी
वोटर लिस्ट से नाम कटने के कारण स्थानीय लोगों ने नेशनल हाइवे को अवरुद्ध कर दिया और सरकारी कार्यालय पर हमला किया। बांस से कार्यालय के शीशे और फर्नीचर तोड़ दिए गए। कई स्थानों पर टायर जलाने और सड़क पर खाना बनाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में एक लाख से अधिक लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, लेकिन स्थानीय लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि उनके नाम वोटर लिस्ट में कैसे आएंगे।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
अधिकारियों के घेराव और हाइवे अवरुद्ध करने की घटना पर बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह घटना सभी को भयभीत करने वाली है। उन्होंने कहा कि 9 न्यायिक मजिस्ट्रेट को रोका गया और उनकी गाड़ी को तोड़ा गया। जब एसपी उन्हें वहां से बचा रहे थे, तब महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट्स की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उनके उकसाने वाले बयानों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
TMC की प्रतिक्रिया
इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा कि वे वहां हो रही घटनाओं का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि जो स्थिति है, उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने ही नाम काटने का काम किया और लीगल वोटर्स को परेशान किया। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी कुछ संगठनों को स्पॉन्सर कर रही है ताकि मुद्दा बनाया जा सके।
