पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के एग्जिट पोल: सटीकता का विश्लेषण
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल का विश्लेषण
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बाद, तमिलनाडु, केरल, असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल आज शाम जारी किए जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार एग्जिट पोल के आंकड़े कितने सटीक साबित होते हैं। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में, बंगाल और तमिलनाडु के एग्जिट पोल्स को समझना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। वहीं, असम और केरल में पिछले चुनावों के दौरान एग्जिट पोल्स की दिशा आमतौर पर सही रही है। 2021 के चुनाव में पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य था जहाँ पोल्स का औसत वास्तविकता से काफी दूर था।
जैसा कि हमेशा होता है, जो पार्टी एग्जिट पोल में जीतती है, उसके समर्थक मिठाई बांटते हैं। वहीं, हारने वाले दल के कार्यकर्ता यह कहते हैं कि यह सिर्फ एक अनुमान है, असली परिणाम चार मई को आएंगे, जिसमें उनकी पार्टी जीत हासिल करेगी। आइए, एग्जिट पोल के पहले जानते हैं कि पिछले तीन चुनावों में इन राज्यों के एग्जिट पोल और वास्तविक परिणामों में कितनी सटीकता रही है।
पश्चिम बंगाल: एग्जिट पोल की असफलता
पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं।
- 2021: एग्जिट पोल सबसे अधिक गलत साबित हुए। कई सर्वेक्षणों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान लगाया गया था, लेकिन परिणाम विपरीत निकले। तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को केवल 77 सीटें मिलीं। हालांकि, भाजपा की यह जीत पिछले चुनावों के आधार पर बड़ी मानी गई।
- 2016: एग्जिट पोल्स ने तृणमूल कांग्रेस की वापसी का अनुमान लगाया, लेकिन जीत की ताकत कम आंकी। परिणाम में तृणमूल कांग्रेस ने 211 सीटें जीतीं।
- 2011: एग्जिट पोल में तृणमूल कांग्रेस और उसके सहयोगियों को 180-182 सीटें दी गईं, जबकि लेफ्ट को सौ से अधिक सीटें मिलने का अनुमान था। असल में, तृणमूल कांग्रेस ने 184 सीटें जीतीं और लेफ्ट पार्टियां 62 पर सिमट गईं।
इस प्रकार, 2011 के चुनाव में एग्जिट पोल ने ममता की जीत को तो पकड़ा, लेकिन सटीक आंकलन में चूक हुई। पिछले दोनों चुनावों में पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल लगभग असफल रहे।
असम: परिणामों का सही अनुमान
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं।
- 2021: एग्जिट पोल ने भाजपा गठबंधन की वापसी का अनुमान लगाया था। असल में, भाजपा गठबंधन ने लगभग इसी दायरे में जीत दर्ज की और सरकार बनाने में सफल रहा।
- 2016: एग्जिट पोल ने सत्ता परिवर्तन और भाजपा गठबंधन की बढ़त का अनुमान लगाया, और असली नतीजे में भी भाजपा गठबंधन जीता।
- 2011: एग्जिट पोल में कुछ गड़बड़ थी, लेकिन असली परिणाम में कांग्रेस ने सरकार बनाई। इस चुनाव में भाजपा को केवल पांच सीटें मिलीं।
इस प्रकार, पिछले तीन चुनावों में असम में एग्जिट पोल काफी हद तक सटीक रहे।
तमिलनाडु: मिश्रित परिणाम
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं।
- 2021: एग्जिट पोल ने डीएमके गठबंधन की जीत का सही अनुमान लगाया, लेकिन सीटें अपेक्षा से कम रहीं।
- 2016: कई एग्जिट पोल डीएमके की जीत का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन एआईएडीएमके ने सत्ता बचा ली।
- 2011: एग्जिट पोल ने एआईएडीएमके को 105 से 176 सीटें दीं, जबकि डीएमके को 54 से 130 सीटों पर जीत का अनुमान था। असली परिणाम में एआईएडीएमके ने 203 सीटें जीतीं।
इस प्रकार, तमिलनाडु में एग्जिट पोल्स का रिकॉर्ड मिलाजुला रहा है।
केरल: एग्जिट पोल्स की सटीकता
केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं।
- 2021: अधिकांश एग्जिट पोल ने एलडीएफ की वापसी का अनुमान लगाया, जो सही साबित हुआ।
- 2016: अधिकतर एग्जिट पोल ने एलडीएफ की जीत का अनुमान लगाया, और नतीजा भी वही आया।
- 2011: उस वर्ष अधिकांश पोल्स ने यूडीएफ को आगे दिखाया, और असली परिणाम में भी यूडीएफ को 72 और एलडीएफ को 68 सीटें मिलीं।
इस प्रकार, केरल में एग्जिट पोल अक्सर सही दिशा में होते हैं।
पुडुचेरी: एग्जिट पोल की सटीकता
पुडुचेरी में विधानसभा सीटों की संख्या 33 है, लेकिन चुनाव केवल 30 पर होते हैं।
- 2021: एग्जिट पोल ने एनडीए को बढ़त दी, और असली नतीजे भी सटीक रहे।
- 2016: एग्जिट पोल ने कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के पक्ष में अनुमान लगाया, और अंतिम नतीजे में यही गठबंधन आगे रहा।
- 2011: एग्जिट पोल ने सही अनुमान लगाया, और अंतिम परिणाम में एन रंगास्वामी की सरकार चली गई।
इस प्रकार, पुडुचेरी में एग्जिट पोल मोटे तौर पर सही रहे हैं।
इस प्रकार, पिछले दो विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल असम में सटीक रहे। केरल और पुडुचेरी में भी काफी हद तक सही रहे। तमिलनाडु के पोल और असली परिणाम मिलेजुले रहे। पश्चिम बंगाल का रिकॉर्ड सबसे कमजोर रहा है, जहाँ सभी अनुमान गलत साबित हुए।
