पश्चिम एशिया संघर्ष का भारत पर संभावित प्रभाव

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक चलती है, तो भारत के वैश्विक निर्यात पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने बताया कि इस संकट का वास्तविक प्रभाव अगले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा। सरकार सप्लाई चेन को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन आयात और निर्यात में कमी आ सकती है। दवा उद्योग पर भी संकट का असर पड़ा है, विशेषकर आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति पर।
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भारत की आर्थिक स्थिति पर संकट का असर

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का भारत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक चलती है, तो हमारे वैश्विक निर्यात पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस विषय पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध लम्बा खिंचता है, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।


‘चिंतन शिविर-फार्मा एक्सपोर्ट ग्रोथ’ के तहत हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने पश्चिम एशिया के संकट के कारण आयात और निर्यात दोनों में कमी आई है। इसका मुख्य कारण यह है कि ऊर्जा भारतीय आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


पश्चिम एशिया में भारत का निर्यात लगभग 12-13 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र में जाता है। यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो अन्य वैश्विक बाजारों में भी हमारे निर्यात पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस संकट का वास्तविक प्रभाव अगले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा।


सरकार सप्लाई चेन को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन आयात और निर्यात में कमी आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी इसके प्रभाव कई महीनों या वर्षों तक बने रह सकते हैं।


अग्रवाल ने बताया कि दवा उद्योग पर भी संकट का असर पड़ा है, विशेषकर आवश्यक कच्चे माल और रसायनों की आपूर्ति पर। सरकार LPG की सीमित उपलब्धता को विभिन्न क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही है।