पटना हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: EPFO को 11 साल बाद लौटाने होंगे ब्याज सहित पैसे

पटना हाई कोर्ट ने EPFO को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जिसमें उसे 11 साल बाद करदाता को उसकी जमा राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने 'अनुचित लाभ' के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि EPFO ने करदाता के पैसे को लंबे समय तक अपने पास रखकर न केवल अनुचित लाभ उठाया, बल्कि उसे ब्याज कमाने के अवसर से भी वंचित किया। यह मामला एक PF असेसमेंट ऑर्डर से शुरू हुआ था, जिसमें एक संगठन को बड़ी राशि जमा करने का निर्देश दिया गया था। जानें इस फैसले की पूरी कहानी और इसके पीछे की पृष्ठभूमि।
 | 
पटना हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: EPFO को 11 साल बाद लौटाने होंगे ब्याज सहित पैसे gyanhigyan

पटना हाई कोर्ट का निर्णय

15 अप्रैल, 2026 को पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार ने 'अनुचित लाभ' के सिद्धांत का उपयोग करते हुए यह निर्णय सुनाया कि एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) किसी करदाता द्वारा जमा की गई राशि को लगभग 11 वर्षों तक अपने पास नहीं रख सकता, विशेषकर जब PF असेसमेंट को रद्द कर दिया गया हो। कोर्ट ने कहा कि EPFO ने 10 लाख रुपए की जमा राशि को अपने पास रखकर करदाता को उसके पैसे के उपयोग से वंचित रखा है, जिस पर उसका कानूनी अधिकार है। यदि EPFO ने रद्द होने के बाद यह राशि वापस कर दी होती, तो करदाता इसे निवेश कर ब्याज कमा सकता था। इस प्रकार, EPFO ने न केवल अनुचित लाभ उठाया, बल्कि करदाता को भी ब्याज कमाने के अवसर से वंचित किया। इसलिए, पटना हाई कोर्ट ने EPFO को इस राशि पर ब्याज देने का आदेश दिया।


मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 'कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952' के तहत एक PF असेसमेंट ऑर्डर से शुरू हुआ, जिसमें एक संगठन को PF के बकाया के रूप में 20 लाख रुपए से अधिक जमा करने का निर्देश दिया गया था। संगठन ने EPF अपीलेट ट्रिब्यूनल में इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन उसे राशि जमा करने का निर्देश दिया गया। प्रारंभ में, संगठन यह राशि जमा नहीं कर सका, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट के आदेश पर, उसने चार अलग-अलग चालानों के माध्यम से कुल राशि का 50% यानी 10,12,692 रुपए जमा कर दिए।


असेसी की अपील

25 जनवरी, 2023 को 49,453 रुपए जमा करने के बाद, उसने रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर-II को दो पत्र भेजे। इन पत्रों में उसने बताया कि उसने तय की गई राशि चुका दी है, इसलिए EPFO को जमा की गई 10,12,692 रुपए (ब्याज सहित) उसे वापस करनी चाहिए। हालांकि, EPFO ने एक दशक से अधिक समय तक इस राशि को अपने पास रखा।


EPFO का तर्क और कोर्ट का निर्णय

EPFO के वकील ने तर्क किया कि ऐसी जमा राशि पर ब्याज देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। पटना हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि 2009 में 10.12 लाख रुपए जमा किए गए थे और उन्हें अक्टूबर 2023 में ही वापस किया गया। कोर्ट ने कहा कि EPFO ने इस राशि को अपने पास रखकर उसका उपयोग किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'अनुचित लाभ' के सिद्धांत के अनुसार, किसी व्यक्ति को दूसरे की कीमत पर अनुचित तरीके से लाभ उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।