न्यूयॉर्क के मेयर ने कोहिनूर हीरे की वापसी की उठाई मांग

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किंग चार्ल्स तृतीय से कोहिनूर हीरे की वापसी की मांग की। उन्होंने इसे औपचारिक बातचीत के बजाय सीधे उठाने का निर्णय लिया। यह बयान भारत और ब्रिटिश राजशाही के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को फिर से जीवित करता है। ममदानी का यह बयान ऐतिहासिक न्याय की मांग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें करोड़ों भारतीयों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। जानें इस मुद्दे के पीछे का इतिहास और इसके महत्व को।
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न्यूयॉर्क के मेयर ने कोहिनूर हीरे की वापसी की उठाई मांग gyanhigyan

कोहिनूर हीरे की वापसी की मांग

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने एक महत्वपूर्ण और साहसिक बयान देते हुए ब्रिटिश राजशाही और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को फिर से जीवित कर दिया है। बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, ममदानी ने कहा कि यदि उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय से मिलने का अवसर मिलता है, तो वे औपचारिक बातचीत के बजाय सीधे ‘कोहिनूर’ हीरे की वापसी की मांग करेंगे।

न्यूयॉर्क के मेयर ने कोहिनूर हीरे की वापसी की उठाई मांग

मेयर ममदानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यदि मैं राजा से बात करूंगा… तो मैं उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए प्रेरित करूंगा।”

यह ऐतिहासिक न्याय की मांग किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला द्वारा 9/11 हमलों की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर न्यूयॉर्क के ‘वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ के दौरे के दौरान की जा रही है, जिसमें मेयर ममदानी भी शामिल होंगे। जहां आमतौर पर मेयर और ब्रिटिश राजशाही के बीच की मुलाकातें प्रोटोकॉल और कूटनीति तक सीमित रहती हैं, वहीं ममदानी का यह बयान इसे ‘ऐतिहासिक न्याय’ के मंच में बदल देता है।

कोहिनूर: लूट या उपहार?

भारत की गोलकुंडा खदानों से निकला यह 105.6 कैरेट का हीरा केवल एक पत्थर नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक है। इतिहास बताता है कि 1849 में एंग्लोसिख युद्ध के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 वर्षीय महाराजा दलीप सिंह को लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया, जिसके तहत यह हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंपा गया।

भारत इसे लंबे समय से “लूट का खजाना” मानता आया है, जबकि ब्रिटिश सरकार इसे एक कानूनी संधि का हिस्सा बताती है। ममदानी के विचारों से सहमत होकर करोड़ों भारतीय आज भी इसे औपनिवेशिक शोषण की एक याद मानते हैं, जिसे वापस अपने देश आना चाहिए।