नोएडा हिंसा: सुनियोजित साजिश का खुलासा, पाकिस्तान का कनेक्शन
नोएडा में हिंसा की सच्चाई
नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा के संबंध में पुलिस ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसमें यह बताया गया है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी। इस मामले में सोशल मीडिया और बाहरी तत्वों की संलिप्तता सामने आई है। जांच में पाकिस्तान से संचालित X अकाउंट, QR कोड के माध्यम से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप और 62 गिरफ्तारियों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
क्या यह हिंसा पूर्व नियोजित थी?
पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि नोएडा में हुई हिंसा एक 'मेलाफाइड इंटेंशनली ऑर्गेनाइज्ड एक्टिविटी' थी। इसका अर्थ है कि यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसे पूर्व में योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। पुलिस का मानना है कि कुछ लोग औद्योगिक क्षेत्रों को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे थे।
कौन हैं आरोपी?
जांच में मनीषा चौहान, रूपेश राय और आदित्य आनंद के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, रूपेश राय खुद को ऑटो चालक बताता है, जबकि आदित्य आनंद बेरोजगार है। ये लोग विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं, जिससे इनके नेटवर्क पर सवाल उठ रहे हैं।
व्हाट्सएप और QR कोड का उपयोग
पुलिस की जांच में यह सामने आया कि 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा में आंदोलन की शुरुआत हुई। 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनके माध्यम से मजदूरों को एकजुट किया गया।
हिंसा का कारण क्या था?
पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन शुरू हुआ और 11 अप्रैल को रोड जाम के लिए उकसाया गया। हालांकि, कुछ लोगों ने उत्तेजक भाषण देकर माहौल को भड़काया।
13 अप्रैल की घटनाएँ
पुलिस ने बताया कि 13 अप्रैल को मदरसन कंपनी के सामने लोगों को भड़काया गया। इस दौरान भीड़ को उकसाने में वही लोग सक्रिय थे।
सोशल मीडिया और पाकिस्तान का कनेक्शन
पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल को दो X अकाउंट्स से गलत सूचना फैलाई गई। ये अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और पिछले तीन महीनों से VPN के जरिए काम कर रहे थे।
पुलिस की कार्रवाई
नोएडा पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की है। अब तक 13 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिसमें कुल 62 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनमें से 9 लोग आगजनी में शामिल थे।
