नेपाल में युवा आंदोलन: प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ प्रदर्शन तेज
युवाओं का फिर से सड़कों पर उतरना
नेपाल में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन ने राजनीतिक परिदृश्य को बदलने के कुछ ही महीनों बाद, अब वही पीढ़ी प्रधानमंत्री बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। पहले उन्हें बदलाव का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब वे प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के प्रदर्शनों में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों, कार्यकर्ताओं, राइड-हेलिंग ड्राइवरों और विपक्ष के समर्थकों ने एक युवा ड्राइवर की मौत के मामले में जवाबदेही की मांग की है, साथ ही भूमि रहित बस्तियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर भी नाराजगी व्यक्त की है। कई युवा नेपाली मानते हैं कि ये घटनाएँ प्रशासन की विफलताओं का केवल एक संकेत हैं।
बालेन शाह का उत्थान और गिरावट
जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरना
2025 में जनरेशन जेड के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद, बालेन शाह ने युवा समर्थन के बल पर सत्ता में आए। उनकी पार्टी ने संसद में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। शाह ने पारदर्शिता, प्रभावी शासन और संस्थागत सुधारों का वादा किया था। हालांकि, कई महीनों बाद, युवा मतदाता कहते हैं कि कुछ भी नहीं बदला है। आलोचकों का कहना है कि सरकार ने सत्ता को केंद्रीकृत किया है और जनता से दूरी बना ली है।
ड्राइवर की मौत ने भड़काई आग
गणेश नेपाली की आत्मदाह की घटना
हाल के प्रदर्शनों का मुख्य कारण 25 वर्षीय राइडर गणेश नेपाली की मौत है। यह घटना काठमांडू के पासपोर्ट विभाग के बाहर हुई, जहां पुलिस ने उन्हें मोटरसाइकिल हटाने के लिए कहा। विवाद के बाद, गणेश ने खुद को आग लगा ली। इस घटना ने व्यापक आक्रोश को जन्म दिया, जब वीडियो में दिखाया गया कि उन्हें स्ट्रेचर पर नहीं, बल्कि वाहन में डाला गया।
प्रदर्शन का विस्तार
काठमांडू में विरोध प्रदर्शन
गणेश नेपाली की मौत ने एक बड़े विरोध आंदोलन का रूप ले लिया। राइड-हेलिंग ड्राइवर, छात्र और स्थानीय निवासी काठमांडू के मैतीघर मंडला में इकट्ठा हुए और न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शाह के इस्तीफे की भी मांग की।
सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी
अवैध बस्तियों का उन्मूलन
सरकार की विवादास्पद कार्रवाई ने भी जनता की नाराजगी को बढ़ाया है। हजारों परिवारों को बेघर किया गया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह आवश्यक है। कई परिवारों को स्थायी आवास या आजीविका नहीं मिली है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
संसद में विरोध
प्रदर्शन संसद में भी पहुंचे हैं। विपक्षी नेताओं ने सरकार की आलोचना की है और जवाबदेही की मांग की है। गृह मंत्री ने कहा कि आत्मदाह का मामला स्थानीय सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
युवाओं की निराशा
जनरेशन जेड की निराशा
युवाओं के लिए ये प्रदर्शन केवल दो मुद्दों पर गुस्सा नहीं हैं। बालेन शाह के प्रति उनकी उम्मीदें अब निराशा में बदल गई हैं। वे अब मानते हैं कि सरकार पारंपरिक राजनीति से दूर नहीं हो पाई है।
