नेपाल में नए कस्टम नियमों से व्यापार में संकट, महंगाई का खतरा

नेपाल में हाल ही में लागू हुए नए कस्टम नियमों ने व्यापार में संकट पैदा कर दिया है। भारत से आने वाले सामान पर एमआरपी का होना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे सीमा पर हजारों कंटेनर फंसे हुए हैं। व्यापारियों का कहना है कि यह नियम व्यवहारिक नहीं है, और इससे महंगाई बढ़ने का खतरा है। नेपाल सरकार ने यात्रियों के निजी सामान पर शुल्क छूट की नई व्यवस्था लागू की है, लेकिन व्यापारियों की चिंताएं बनी हुई हैं। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा।
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नेपाल में कस्टम नियमों का प्रभाव

जब अचानक नियमों में बदलाव होता है, तो बाजार पर इसका सीधा असर पड़ता है। वर्तमान में नेपाल में कुछ ऐसा ही स्थिति देखने को मिल रही है। भारत से आने वाले सामान पर नए कस्टम नियमों ने व्यापार तंत्र को हिला कर रख दिया है। सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें, कंटेनरों का जाम और संभावित महंगाई की आशंका एक बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा कर रही हैं। दरअसल, नेपाल सरकार ने 28 अप्रैल से एक नया आदेश लागू किया है। इस आदेश के अनुसार, भारत से आने वाले सभी सामान पर कस्टम क्लीयरेंस से पहले मैक्सिमम रिटेल प्राइस (एमआरपी) का होना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यदि किसी सामान की कीमत 100 नेपाली रुपए से अधिक है, तो उस पर कस्टम ड्यूटी लगेगी, जो तभी लागू होगी जब उस सामान पर पहले से एमआरपी अंकित हो। इसका मतलब है कि अब हर उत्पाद पर पहले से कीमत लिखना आवश्यक है, तभी वह नेपाल में प्रवेश कर सकेगा। इस नियम के लागू होते ही व्यापारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।


व्यापारियों की चिंताएं

पिछले चार दिनों से बड़े पैमाने पर आयात रोक दिया गया है। सीमा पर 1000 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं। भारत-नेपाल सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें लग चुकी हैं। विराट नगर जैसे बड़े कस्टम पॉइंट्स पर स्थिति और भी गंभीर है। कस्टम अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि केवल वही सामान वापस हो रहा है जिसमें पहले से एमआरपी अंकित है। अन्य सभी सामान रुका हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि यह नियम व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि एक कंटेनर में हजारों विभिन्न उत्पाद होते हैं। हर एक पर अलग से एमआरपी लगाना आसान नहीं है। यदि सीमा पर पैकेट खोलकर लेवल लगाना पड़े, तो सामान खराब हो सकता है। पैकेजिंग में क्षति आ सकती है, लागत बढ़ जाएगी और सबसे बड़ी बात, डैमेज और डिटेंशन चार्ज भी लगने लगेंगे। इसका मतलब है कि हर दिन का अतिरिक्त खर्च। यदि यही स्थिति बनी रही, तो नेपाल के बाजार में सामान की कमी हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।


महंगाई का खतरा

महंगाई बढ़ने का खतरा है, और सोचिए, यदि रोजमर्रा का सामान ही नहीं पहुंचेगा, तो क्या होगा? हालांकि, नेपाल सरकार ने हालिया विवाद के बाद कस्टम नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए यात्रियों के निजी सामान पर शुल्क छूट की नई व्यवस्था लागू कर दी है। यह प्रावधान नेपाल राज्य पत्र के तहत जारी अधिसूचना के अनुसार प्रभावी हो गया है। अब जान लीजिए किन चीजों को राहत मिली है: सबसे बड़ी राहत पेट्रोलियम उत्पादों और औद्योगिक कच्चे माल को मिली है। जल्दी खराब होने वाले सामान, फल और सब्जियों की क्लीयरेंस जारी है। अब आप सोच रहे होंगे कि सरकार ने ऐसा नियम क्यों बनाया? दरअसल, नेपाल सरकार पिछले 10 वर्षों से एमआरपी सिस्टम लागू करना चाहती थी। 2012 में भी इस पर नोटिस जारी किया गया था। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही कीमत दिलाना, ओवरचार्जिंग को रोकना और बाजार में पारदर्शिता लाना था। लेकिन इस बार इसे अचानक लागू किया गया, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया। यह केवल एक टैक्स का मामला नहीं है, बल्कि नीति बनाम व्यवहारिकता का मुद्दा है। सरकार का कहना है कि नियम आवश्यक हैं, जबकि व्यापारी यह मानते हैं कि नियम लागू करने का तरीका गलत है। यदि इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर केवल व्यापारियों पर नहीं, बल्कि आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा।