नेपाल में आगामी चुनाव: युवा मतदाता और राजनीतिक बदलाव की उम्मीदें
नेपाल में 5 मार्च को होने वाले चुनाव में युवा मतदाता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। पिछले साल के प्रदर्शनों के बाद, नए मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और युवा नेता बालेंद्र शाह जैसे प्रमुख दावेदार चुनावी मैदान में हैं। इस चुनाव का परिणाम न केवल नेपाल की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर डालेगा। जानें इस चुनाव की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणामों के बारे में।
| Feb 27, 2026, 19:54 IST
नेपाल के चुनाव की तैयारी
नेपाल में 5 मार्च को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव उस समय हो रहा है जब छह महीने पहले युवा नेतृत्व के भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को हटा दिया था। सितंबर में हुए इन प्रदर्शनों में 77 लोगों की जान गई और दो हजार से अधिक लोग घायल हुए। दो दिनों तक चली हिंसा में सैकड़ों इमारतें नष्ट हो गईं। अब देश एक नए राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है।
मतदाता और चुनाव प्रक्रिया
इस हिमालयी देश की 30 मिलियन की आबादी में लगभग 19 मिलियन मतदाता 275 सदस्यीय संसद के लिए मतदान करेंगे। पिछले साल के प्रदर्शनों के बाद लगभग एक मिलियन नए मतदाता जोड़े गए हैं, जिनमें अधिकांश युवा हैं। 165 सीटों पर सीधे चुनाव होंगे, जबकि बाकी सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भरी जाएंगी। चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार 65 राजनीतिक दल चुनावी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला जटिल और बहुकोणीय होगा।
चुनाव के मुद्दे
विश्लेषकों का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश इस चुनाव का मुख्य मुद्दा है। रोजगार सृजन भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, क्योंकि देश की एक पांचवीं आबादी गरीबी में जी रही है और युवा बेरोजगारी दर उच्च बनी हुई है। युवा उम्मीदवार आर्थिक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही का वादा कर रहे हैं, जबकि अनुभवी नेता स्थिरता और सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही टकराव चुनाव की दिशा तय करेगा।
प्रमुख दावेदार
झापा 5 निर्वाचन क्षेत्र इस बार राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बना हुआ है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली फिर से चुनावी मैदान में हैं। 74 वर्षीय ओली के सामने युवा मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग है, जो उनके कार्यकाल के दौरान असंतोष के कारण सड़कों पर उतरा था। उनके सामने 35 वर्षीय बालेंद्र शाह हैं, जो काठमांडू के मेयर पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय राजनीति में आए हैं। वह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और ओली को चुनौती देने का इरादा रखते हैं।
गठबंधन की संभावना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक दल के लिए स्पष्ट बहुमत प्राप्त करना कठिन होगा। ऐसे में गठबंधन राजनीति महत्वपूर्ण हो जाएगी। यह देखा जाएगा कि कौन सा दल गठबंधन में प्रमुख भूमिका निभाता है, जिससे नीतिगत प्राथमिकताएं और विदेश नीति की दिशा प्रभावित होगी।
नेपाल की विदेश नीति
नेपाल की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और चीन के बीच संतुलन है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि चीन ने बुनियादी ढांचे में निवेश किया है। नई सरकार को इस संतुलन को बनाए रखना होगा।
चुनाव का महत्व
नेपाल का यह चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि राजनीतिक संस्कृति के पुनर्निर्माण का अवसर भी है। युवा मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन अपेक्षाएं भी बड़ी हैं। आने वाला जनादेश बताएगा कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
