नूंह में सर्कस कलाकार की मौत: परिवार ने गुरु पर लगाया आरोप

नूंह जिले में सर्कस कलाकार दीपक की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप है कि उनकी मौत उनके गुरु के लालच का परिणाम थी। दीपक ने 72 घंटे तक गड्ढे में रहने का खतरनाक करतब दिखाया, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। जानें इस मामले में पुलिस और प्रशासन की क्या कार्रवाई हो रही है।
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दीपक की दुखद कहानी

नूंह जिले में एक गड्ढे में तीन दिन तक जिंदा दफन रहने के बाद दम घुटने से सर्कस कलाकार दीपक की मृत्यु हो गई। उनके परिवार का कहना है कि यह घटना एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उनके गुरु के लालच का परिणाम थी। केवल 27 वर्ष की आयु में दीपक अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे। फरीदाबाद के गौंची गांव से ताल्लुक रखने वाले दीपक एक पारंपरिक कलाकार परिवार से थे, जो विभिन्न गांवों में प्रदर्शन करते थे।


खतरनाक करतब का परिणाम

दीपक ने लगभग 10 वर्षों तक इस कला में भाग लिया। उन्होंने कई बार जिंदा दफन होने का करतब दिखाया था, जिसमें उन्हें बोरी में बंद करके दफनाया जाता था, लेकिन वह कभी 24 घंटे से अधिक समय तक नहीं रहे थे। परिवार का आरोप है कि उनके गुरु सतीश उर्फ पुलसिया ने 7,100 रुपये की पूरी रकम पाने के लिए दीपक को 72 घंटे तक गड्ढे में बंद रखा।


परिवार का आरोप

दीपक की भाभी सुनीता ने बताया कि हर शो में दर्शकों को बताया जाता था कि 7,100 रुपये जमा होने के बाद ही दीपक को बाहर निकाला जाएगा। यह केवल दर्शकों को अधिक पैसे देने के लिए प्रेरित करने की एक चाल थी। असल में, चाहे कितनी भी रकम जमा हो, 24 घंटे पूरे होते ही दीपक को बाहर निकाल लिया जाता था।


गांव वालों का विरोध

सुनीता ने कहा, "इस बार 24 घंटे में 7,100 रुपये का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, इसलिए पुलसिया ने दफन रहने की अवधि को बढ़ाकर 72 घंटे कर दिया। जब ग्रामीणों ने विरोध किया, तो गड्ढे से मिट्टी हटाई गई, लेकिन तब तक दीपक की मृत्यु हो चुकी थी।"


पुलिस की कार्रवाई

परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और पुलसिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सदर तावडू पुलिस थाने के प्रभारी राजेश कुमार ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


दीपक का परिवार

दीपक के बड़े भाई मनीष ने बताया कि वह भी इस करतब को सड़क पर दिखाते थे, लेकिन शादी के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया। मनीष ने यह भी बताया कि दीपक एक बार जेल में रह चुके थे और जमानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने फिर से करतब दिखाना शुरू किया था।


मां का दुख

दीपक के रिश्तेदारों ने बताया कि वह परिवार का एकमात्र सहारा थे। उनकी मां बबीता ने कहा, "दीपक ही मेरी देखभाल करता था, लेकिन बेटे की मौत के बाद मैं पूरी तरह बेसहारा हो गई हूं।"


अवैध स्टंट की जांच

जांच के दौरान पता चला कि 23 जुलाई को दीपक ने ‘प्रत्यक्ष समाधि’ का करतब दिखाने से पहले भीड़ का मनोरंजन करने के लिए कई स्टंट किए थे। इसके बाद दीपक को एक बोरी में डालकर गड्ढे में उतारा गया और ऊपर से मिट्टी डाल दी गई। तीन दिन बाद जब उसे बाहर निकाला गया, तो वह मृत पाया गया।


प्रशासन की प्रतिक्रिया

नूंह के जिला आयुक्त अखिल पिलानी ने कहा था कि ऐसे स्टंट अवैध हैं और प्रशासन यह जांच करेगा कि बिना अनुमति के जानलेवा कार्यक्रम कैसे आयोजित किया गया।