नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में सीबीआई की कार्रवाई

सीबीआई ने नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन विषय विशेषज्ञों के खिलाफ कार्रवाई की है। आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने गोपनीयता का उल्लंघन किया और प्रश्नपत्रों को प्रसारित किया। इस मामले में उन्हें उम्रकैद और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सीबीआई की जांच के परिणाम।
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सीबीआई ने दिल्ली की अदालत में पेश किया मामला

नई दिल्ली, 7 अगस्त: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली की एक अदालत को सूचित किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञों ने 'गोपनीयता की जिम्मेदारी' का उल्लंघन किया है और नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्रों को लीक किया। आरोपपत्र में इन आरोपियों को उम्रकैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करने का खतरा है। जांच एजेंसी ने उन्हें 'लोकसेवक' माना है, क्योंकि उन्हें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।


नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन और प्रश्नपत्र लीक

नीट-यूजी परीक्षा का आयोजन एनटीए द्वारा उन छात्रों के लिए किया जाता है जो चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिला लेना चाहते हैं। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के चलते, एनटीए ने 3 मई को आयोजित परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया था और फिर 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित की गई।


शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और आरोपपत्र की जानकारी

नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध प्रदर्शनों के बाद, धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। सीबीआई के आरोपपत्र में जीव विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंडहरे, रसायन विज्ञान विशेषज्ञ पी. वी. कुलकर्णी और भौतिक विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार का नाम शामिल है। इन तीनों ने 'गोपनीयता प्रमाणपत्र' पर हस्ताक्षर किए थे।


गोपनीयता का उल्लंघन और सीबीआई की जांच

आरोपपत्र के अनुसार, इन विशेषज्ञों ने यह घोषणा की थी कि वे प्रश्नपत्र को स्वयं नहीं लिखेंगे और इसे सुरक्षित स्थान पर रखेंगे। हालांकि, सीबीआई की जांच में यह सामने आया कि मंडहरे ने पुणे में कोचिंग कक्षाएं चलाईं, कुलकर्णी ने परीक्षा से पहले विशेष कक्षाएं आयोजित कीं, और हवलदार ने गोपनीय प्रश्नपत्रों को प्रसारित किया।


सीबीआई की कार्रवाई और संभावित सजा

सीबीआई ने इन तीनों विशेषज्ञों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस अधिनियम के तहत, उन्हें अधिकतम 10 साल की कैद और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं, जिसमें पेपर लीक करने का संगठित आरोप शामिल है।