नीट यूजी 2026 पेपर लीक: राजस्थान पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द
नीट यूजी 2026 के पेपर लीक ने लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। हालांकि, राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने परीक्षा से पहले ही पेपर माफिया के इरादों का पता लगा लिया, जिसके चलते परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इस निर्णय से छात्रों में निराशा तो फैली, लेकिन एसओजी की तत्परता ने पेपर माफिया के मंसूबों को नाकाम कर दिया।
पेपर लीक के चौंकाने वाले तथ्य
राजस्थान पुलिस की एसओजी ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, पेपर लीक का खेल 'गेस पेपर' के माध्यम से चलाया जा रहा था। जांच में यह सामने आया कि नीट के पेपर से संबंधित एक गेस पेपर सोशल मीडिया और कुछ कोचिंग सर्किल में तेजी से फैल रहा था। जब इसकी जांच की गई, तो पता चला कि बायोलॉजी के 90 में से 90 सवाल एकदम सही थे।
इसके अलावा, केमिस्ट्री के 46 में से 35 सवाल भी असली पेपर से मेल खा रहे थे। कई सवालों में तो शब्दों और पंक्चुएशन में भी कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस खुलासे के बाद एसओजी ने मामले की गहराई से जांच शुरू की और लगभग डेढ़ दर्जन लोगों को हिरासत में लिया।
पेपर लीक का नेटवर्क
जांच एजेंसियों का आरोप है कि मनीष यादव ने लीक हुए सवालों को मिलाकर एक प्रश्न बैंक तैयार किया था। यह पेपर लीक की चेन नासिक से शुरू होकर हरियाणा होते हुए राजस्थान पहुंची। नासिक में एक प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्नपत्र की कॉपी बनाई गई, जिसे बाद में हरियाणा और फिर जयपुर लाया गया।
सूत्रों के अनुसार, यह पेपर सीकर तक पहुंचा और फिर जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल तक फैलाया गया।
संदिग्धों की गिरफ्तारी
नासिक के इंदिरानगर से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, जो बीएएमएस की पढ़ाई कर रहा है। आरोपी ने अपना हुलिया बदल लिया था और मंदिर दर्शन के लिए जा रहा था। पूछताछ में उसने पुणे कनेक्शन का भी जिक्र किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर लीक को हाई-टेक तरीके से अंजाम दिया गया था। प्रश्नपत्र को हाई-डेफिनिशन स्कैनर से स्कैन किया गया और फिर इसे टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए फैलाया गया।
सीबीआई को सौंपा गया मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और एक विशेष जांच टीम गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
