नासिक में TCS BPO सेंटर में यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपों के बाद कामकाज स्थगित
नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के बीपीओ सेंटर में यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के चलते कामकाज को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। जांच में आठ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाए हैं कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। पुलिस ने अब तक नौ FIR दर्ज की हैं और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
| Apr 16, 2026, 11:45 IST
TCS BPO सेंटर में विवाद और अस्थायी कामकाज रोक
नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के बीपीओ सेंटर में हाल ही में गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है, जिसके चलते कंपनी ने कामकाज को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के प्रकाश में, कंपनी ने सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक घर से काम करने का निर्देश दिया है।
जांच और आरोपों का खुलासा
TCS सेंटर की जांच तब शुरू हुई जब यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के आरोप सामने आए। एक विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले की जांच शुरू की है। अब तक आठ महिला कर्मचारी सामने आई हैं, जिन्होंने कई वर्षों से चल रहे यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामलों का आरोप लगाया है। आरोपों में यह भी शामिल है कि कर्मचारियों पर उनकी इच्छा के खिलाफ विशेष प्रकार का भोजन खाने और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का दबाव डाला जाता था।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
नासिक के पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक के अनुसार, जांच में पता चला है कि सात पुरुष आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और महिला कर्मचारियों को निशाना बना रहे थे। अब तक नौ FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें से एक एक पुरुष कर्मचारी ने धार्मिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सात पुरुष और एक महिला शामिल हैं। एक अन्य महिला आरोपी अभी भी फरार है।
आरोपियों की पहचान और स्थिति
गिरफ्तार किए गए पुरुष आरोपियों में दानिश शेख, तौसीफ़ अत्तार, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफ़ी शेख, आसिफ़ आफ़ताब अंसारी और शाहरुख शेख शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि कुछ आरोपी उच्च पदों पर थे और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया। एक महिला, जो HR हेड थी, ने कथित तौर पर एक पीड़ित को शिकायत दर्ज कराने से रोका।
जांच में सहयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका
पुलिस ने राज्य खुफिया विभाग, आतंकवाद निरोधक दस्ता और राष्ट्रीय जांच एजेंसी से संपर्क किया है ताकि किसी भी संभावित बड़े जुड़ाव की जांच की जा सके। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और 18 अप्रैल को TCS BPO यूनिट में जाकर जांच करने के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है।
