नरेश गुजराल का बड़ा साइबर फ्रॉड: 7.8 करोड़ रुपये की ठगी

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए हैं, जिसमें उन्हें 7.8 करोड़ रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा। धोखेबाजों ने उनकी पहचान का दुरुपयोग करते हुए एक फर्जी अकाउंट बनाया और उनके कर्मचारी से पैसे ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने अब तक 4 करोड़ रुपये को फ्रीज़ कर दिया है और धोखाधड़ी की जांच जारी है। जानें इस मामले में और क्या हुआ और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
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नरेश गुजराल का बड़ा साइबर फ्रॉड: 7.8 करोड़ रुपये की ठगी gyanhigyan

साइबर धोखाधड़ी का मामला

पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं। धोखेबाजों ने एक मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करते हुए उनकी पहचान का दुरुपयोग किया और उनके कर्मचारी के मोबाइल फोन के संपर्कों में बदलाव करके उनसे लगभग 7.8 करोड़ रुपये ठग लिए। पुलिस ने अब तक ठगी गई राशि में से 4 करोड़ रुपये को फ्रीज़ करने में सफलता प्राप्त की है। डीसीपी (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि नरेश गुजराल की शिकायत पर 16 जून को FIR दर्ज की गई थी। त्वरित कार्रवाई करते हुए, धोखाधड़ी की कुल राशि में से ₹4.28 करोड़ को विभिन्न बैंकों में रोक दिया गया है।


धोखाधड़ी की प्रक्रिया

जांचकर्ताओं के अनुसार, यह धोखाधड़ी 12 से 16 जून के बीच हुई। इस दौरान साइबर अपराधियों ने गुजराल की डिस्प्ले पिक्चर का उपयोग करके उनके नाम से एक फर्जी अकाउंट बनाया। इसके बाद, आरोपियों ने गुजराल की कंपनी के एक कर्मचारी से संपर्क किया और उन्हें आवश्यक संदेश भेजकर कई RTGS ट्रांसफर करने के निर्देश दिए, जो वास्तविक व्यापारिक जरूरतों से जुड़े प्रतीत हो रहे थे। कर्मचारी ने इन संदेशों पर भरोसा करते हुए चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन किए और कुल 7.8 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।


पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि शुरू में इस धोखाधड़ी का पता नहीं चला क्योंकि भुगतान सामान्य व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा लग रहे थे। इस दौरान, बैंक ने असामान्य रूप से बड़े ट्रांजैक्शन को चिह्नित किया और कंपनी के CFO से मंजूरी मांगी। CFO ने यह सोचकर ट्रांसफर को मंजूरी दी कि उन्हें गुजराल ने अनुमति दी है। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब कंपनी के एक अधिकारी को गड़बड़ी का संदेह हुआ और उसने गुजराल की बेटी से संपर्क किया। उन्होंने अपने पिता से बात की और पता चला कि ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया था। इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।


हैकिंग का तरीका

जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि धोखाधड़ी करने वालों ने पहले एक कर्मचारी को एक मैलिशियस फ़ाइल भेजी थी, जिससे उसका मोबाइल फ़ोन हैक हो गया। डिवाइस का एक्सेस मिलने के बाद, आरोपियों ने उसमें सेव संपर्क जानकारी में बदलाव कर दिया। जांचकर्ताओं ने बताया कि गैंग ने कर्मचारी की संपर्क सूची में गुजराल का फोन नंबर बदलकर अपना नंबर डाल दिया, जबकि उनकी प्रोफ़ाइल फ़ोटो वही रखी। इस कारण, धोखेबाज़ों द्वारा भेजे गए संदेश ऐसे लगते थे जैसे वे खुद गुजराल ने भेजे हों, जिससे धोखा अधिक विश्वसनीय बन गया।


गुजराल का बयान

कपड़ों के व्यवसाय से जुड़े गुजराल ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में उनके CFO दुर्भाग्यवश इस धोखाधड़ी का शिकार हो गए। उन्होंने दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम टीम की प्रशंसा की कि उन्होंने तेजी से कार्रवाई की और लगभग 70 प्रतिशत राशि वापस प्राप्त कर ली। आने वाले दिनों में और राशि वापस मिलने की उम्मीद है। पुलिस ने बताया कि चोरी की गई राशि को चार ट्रांजैक्शन के माध्यम से विभिन्न राज्यों में स्थित बैंक खातों में भेजा गया था।