नदियों में ड्रग्स का प्रभाव: सैल्मन मछलियों पर चिंताजनक अध्ययन

स्वीडन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन ने यह दर्शाया है कि नदियों और झीलों में मौजूद ड्रग्स के अवशेष सैल्मन मछलियों के व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि मछलियों में असामान्य सक्रियता और व्यवहार परिवर्तन हो रहे हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। जानें इस अध्ययन के परिणाम और इसके पर्यावरणीय प्रभाव के बारे में।
 | 
gyanhigyan

नशे की लत का असर Aquatic Animals पर

नशे की लत मानव समाज के लिए एक पुरानी समस्या है, लेकिन अब इसके प्रभाव का दायरा जल जीवों तक भी पहुंचने लगा है। हाल ही में स्वीडन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन ने इस विषय में चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। शोध में पाया गया है कि नदियों और झीलों में मौजूद ड्रग्स के अवशेष मछलियों, विशेषकर सैल्मन प्रजाति, को प्रभावित कर रहे हैं। यह स्थिति पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है.


शोध की पृष्ठभूमि

इस अध्ययन की शुरुआत पर्यावरण वैज्ञानिक जैक ब्रांड ने 2022 में की थी। उनका उद्देश्य यह समझना था कि मानवों द्वारा उपयोग किए जाने वाले ड्रग्स और दवाओं के अंश जल में मिलकर Aquatic Animals के व्यवहार और जीवन चक्र को कैसे प्रभावित करते हैं। उन्होंने स्वीडन की एक झील में सैल्मन मछलियों पर एक नियंत्रित प्रयोग किया। इस दौरान, वैज्ञानिकों ने कुछ मछलियों के शरीर में छोटे कैप्सूल लगाए, जो धीरे-धीरे कोकीन और उसके उप-उत्पाद बेंजोइलेकगोनिन को छोड़ते थे.


असामान्य व्यवहार का अवलोकन

ये रसायनों की मात्रा सामान्य प्रदूषित जल स्रोतों में पाई जाने वाली मात्रा के समान थी। वैज्ञानिकों ने वास्तविक परिस्थितियों का अनुकरण करने का प्रयास किया ताकि यह समझा जा सके कि जल में मौजूद ये रसायन मछलियों को किस हद तक प्रभावित करते हैं। अध्ययन के परिणाम चौंकाने वाले थे। जिन मछलियों को इन पदार्थों के संपर्क में रखा गया, उनका व्यवहार सामान्य मछलियों से काफी भिन्न था। वे तेजी से तैरने लगीं और अपेक्षा से अधिक दूरी तय करने लगीं, जिससे यह संकेत मिला कि इन रसायनों का उनके शरीर और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है.


बेंजोइलेकगोनिन का प्रभाव

अध्ययन में यह भी पाया गया कि कोकीन की तुलना में बेंजोइलेकगोनिन का प्रभाव अधिक था। जिन मछलियों पर इसका असर हुआ, वे और भी अधिक सक्रिय हो गईं। उनका व्यवहार ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वे लगातार किसी उत्तेजना या उच्च स्थिति में हों। यह असामान्य सक्रियता दीर्घकाल में उनके लिए हानिकारक साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के बदलाव केवल मछलियों के व्यवहार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं.


जल स्रोतों में दवाओं का मिश्रण

इसके अलावा, विश्वभर के जल स्रोतों में केवल ड्रग्स ही नहीं, बल्कि कई प्रकार की दवाओं के अंश भी पाए जा रहे हैं। इनमें एंटी-एंजायटी दवाएं, पेनकिलर और अन्य फार्मास्युटिकल उत्पाद शामिल हैं। ये सभी पदार्थ जलीय जीवों के व्यवहार, प्रजनन क्षमता और जीवनकाल पर प्रभाव डाल सकते हैं। लंबे समय में यह स्थिति जैव विविधता के लिए खतरा बन सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्ट वाटर को पूरी तरह से शुद्ध करना आसान नहीं है.