नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत
नई दिल्ली में वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय
नई दिल्ली: भारत की राजधानी एक बार फिर से वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन रही है। दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग मंत्री, रोनाल्ड ओज़ी लामोला, मंगलवार को दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही 14 और 15 मई को होने वाली BRICS विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
भारत की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण मील का पत्थर
भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता के तहत यह पहली बड़ी मंत्रिस्तरीय सभा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अगुवाई में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समूह के भविष्य की दिशा तय करना और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव को और मजबूत करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दौरे पर आए विशिष्ट अतिथि अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे, जो भारत की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है।
‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ का दृष्टिकोण
इस बार की बैठक की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी गई है। यह प्रधानमंत्री मोदी की “ह्यूमैनिटी फर्स्ट” और “पीपलसेंट्रिक” विचारधारा का विस्तार है, जिसे उन्होंने 2025 के ब्राजील समिट के दौरान वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया था। भारत का लक्ष्य वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को एजेंडे के केंद्र में रखना है।
आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा
यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिकाईरान युद्ध के प्रभावों से उबरने की कोशिश कर रही है। इस संदर्भ में BRICS देश मिलकर अंतरराष्ट्रीय शासन व्यवस्था और वैश्विक शक्ति संरचना में बदलाव की मांग को तेज करेंगे। भारत यहाँ एक न्यायपूर्ण और संतुलित विश्व व्यवस्था की मांग का नेतृत्व करता नजर आ रहा है।
विस्तारित BRICS की सामूहिक शक्ति
यह समिट विस्तारित BRICS परिवार के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। इन उभरती हुई शक्तियों के बीच भारत एक ‘महत्वपूर्ण सेतु’ के रूप में कार्य कर रहा है, जो विकासशील और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाने की क्षमता रखता है।
