नई टैक्स व्यवस्था में बचत के तीन प्रमुख तरीके
नई टैक्स व्यवस्था का बढ़ता आकर्षण
नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने वाले करदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि 12.75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं लगता। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि इस व्यवस्था में कोई कर छूट या कटौती नहीं मिलती, जो कि पूरी तरह से सही नहीं है। वास्तव में, नई व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण कटौतियाँ उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से कर योग्य आय को कम किया जा सकता है और कर देनदारी में राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं ऐसे तीन प्रमुख कटौतियों के बारे में।
स्टैंडर्ड डिडक्शन से मिलेगी सीधी राहत
नई टैक्स व्यवस्था के अंतर्गत, वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 75,000 रुपये तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। इस छूट के लिए किसी प्रकार के निवेश, बिल या दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती। यह कटौती सीधे वेतन से घटाई जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की वार्षिक सैलरी 15 लाख रुपये है, तो 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलने के बाद उसकी कर योग्य आय 14.25 लाख रुपये रह जाएगी। बजट 2024 में इस कटौती को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 75,000 रुपये किया गया था, जिससे कर्मचारियों की बचत में वृद्धि हो सके।
NPS में नियोक्ता का योगदान देगा अतिरिक्त फायदा
नई टैक्स व्यवस्था में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के टियर-I खाते में नियोक्ता द्वारा किए गए योगदान पर भी कर छूट मिलती है। कर्मचारी अपनी मूल सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के कुल 14 प्रतिशत तक के नियोक्ता योगदान पर कटौती का दावा कर सकते हैं। यह छूट स्टैंडर्ड डिडक्शन के अतिरिक्त होती है, जिससे कर बचत में वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की मूल सैलरी 10 लाख रुपये है और उसका नियोक्ता NPS खाते में 1.4 लाख रुपये जमा करता है, तो पूरी राशि पर कर लाभ मिल सकता है। हालांकि, NPS, EPF और सुपरएन्युएशन फंड में नियोक्ता के कुल योगदान की सीमा एक वित्त वर्ष में 7.5 लाख रुपये तक होती है।
किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के होम लोन ब्याज पर छूट
नई टैक्स व्यवस्था में स्वयं के उपयोग वाली संपत्ति पर होम लोन ब्याज की छूट उपलब्ध नहीं है, लेकिन किराए पर दी गई संपत्ति के मामले में यह लाभ जारी है। ऐसी संपत्ति को खरीदने, बनाने या मरम्मत के लिए लिए गए लोन पर चुकाए गए ब्याज को कर कटौती के रूप में क्लेम किया जा सकता है। इस छूट की खास बात यह है कि किराए पर दी गई संपत्ति के लिए ब्याज कटौती पर कोई निश्चित ऊपरी सीमा नहीं है। हालांकि, नई टैक्स व्यवस्था के तहत हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान को अन्य आय स्रोतों के साथ समायोजित करने की अनुमति नहीं है।
