धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विवाद पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद पर युवाओं को भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलकर इस्तीफे की बात की थी। जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने जेनरेशन जेड के महत्व पर जोर दिया। ओडिशा में एक कार्यक्रम में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। जानें उनके बयान के पीछे की पूरी कहानी।
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धर्मेंद्र प्रधान का बयान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के लगभग 14 दिन बाद, बीजेपी के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद के दौरान युवाओं को भड़काने और गुमराह करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लिए मंत्री का पद कभी भी देश के युवाओं से बड़ा नहीं रहा।


जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों से संवाद

जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेनरेशन जेड देश का भविष्य है और उनके अपने विचार और सपने हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने नीट विवाद का लाभ उठाकर युवाओं को गलत दिशा में भेजने की कोशिश की। प्रधान ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस्तीफे की चर्चा की थी, जिसके बाद 25 जुलाई को उन्होंने अपना पद छोड़ दिया।


पद का महत्व

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह जेनरेशन जेड को अपने बच्चों की तरह मानते हैं। उनके लिए शिक्षा मंत्री का पद कोई व्यक्तिगत मुद्दा नहीं था, बल्कि देश के युवाओं की उम्मीदें अधिक महत्वपूर्ण हैं। नीट पेपर लीक के बाद, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने लंबे समय तक प्रदर्शन किया, जिसमें उनकी मांग थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं और परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए। इसी दबाव के चलते उन्होंने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया।


नवीन पटनायक पर आरोप

ओडिशा के एक कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हुए प्रदर्शनों में युवाओं का इस्तेमाल किया गया। रायराखोल में बीजेडी कार्यकर्ताओं द्वारा 'धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ' के नारे लगाने पर उन्होंने कहा कि वह ऐसे प्रदर्शनों से डरने वाले नहीं हैं। वह एक किसान के बेटे हैं और अपने कार्य से ओडिशा का नाम कभी खराब नहीं होने देंगे।