धरती की गति में बदलाव: क्या एक दिन 25 घंटे का होगा?
समय का रुकना: एक नई वैज्ञानिक खोज
नेशनल डेस्क: आपने अक्सर सुना होगा कि समय किसी के लिए नहीं रुकता, लेकिन हाल के अध्ययन बताते हैं कि पृथ्वी की गति धीरे-धीरे कम हो रही है। यह 24 घंटे की घड़ी, जिस पर पूरी दुनिया चलती है, वास्तव में चंद्रमा के साथ पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण घर्षण का परिणाम है। वैज्ञानिकों के नवीनतम शोध से पता चलता है कि धरती की गति में कमी आ रही है, जिससे भविष्य में एक दिन 24 घंटे के बजाय 25 घंटे का हो सकता है।
धरती की गति में कमी के कारण
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन और रात का निर्माण होता है। लेकिन यह गति स्थिर नहीं है। वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, हर सदी में धरती का रोटेशन कुछ मिलीसेकंड कम हो रहा है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
1. चंद्रमा का प्रभाव: चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के समुद्रों में ज्वार-भाटा उत्पन्न करता है, जो पृथ्वी की गति को धीमा करता है।
2. जलवायु परिवर्तन और बर्फ का पिघलना: नासा के अनुसार, ग्लेशियरों के पिघलने से पृथ्वी के द्रव्यमान का वितरण बदल रहा है, जिससे गति में कमी आ रही है।
3. आंतरिक गतिविधियाँ: पृथ्वी के कोर और मेंटल में होने वाली हलचलें और भूकंप भी इसकी गति को प्रभावित करते हैं।
समय में बदलाव कब होगा?
यह परिवर्तन इतना धीमा है कि हम इसे अपनी जिंदगी में महसूस नहीं कर सकते। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एक दिन 25 घंटे का होने में लगभग 200 मिलियन साल लग सकते हैं। परमाणु घड़ियों की सहायता से वैज्ञानिक इस सूक्ष्म बदलाव को सटीकता से माप रहे हैं।
सौर और नक्षत्र दिवस का अंतर
हम जिस 24 घंटे को एक दिन मानते हैं, वह 'सौर दिवस' है। जबकि पृथ्वी तारों की तुलना में अपना चक्कर 23 घंटे 56 मिनट में पूरा करती है, जिसे 'नक्षत्र दिवस' कहा जाता है। ये बारीकियाँ भविष्य के 25 घंटों का आधार बन सकती हैं।
