दौसा में महिलाओं का डिजिटल सशक्तिकरण: सीएससी केंद्रों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ

दौसा जिले में महिलाएं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा रही हैं। ये केंद्र न केवल डिजिटल सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक बन गए हैं। महिला संचालकों की सक्रियता से सरकारी योजनाओं की पहुंच में सुधार हुआ है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं। यह पहल न केवल महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर रही है, बल्कि समाज में उनकी भूमिका को भी मजबूत कर रही है।
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दौसा में महिलाओं का डिजिटल सशक्तिकरण: सीएससी केंद्रों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ

महिलाओं की भूमिका में बदलाव

दौसा। घनश्याम प्रजापत | भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) अब सरकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का एक नया रूप ले रहा है। जिला प्रबंधक कमलेश कुमार शर्मा के अनुसार, दौसा जिले में 50 से अधिक सीएससी केंद्रों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। ये महिला संचालक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गई हैं।


डिजिटल इंडिया अभियान के तहत, सीएससी केंद्र अब केवल सेवा केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि ये महिला सशक्तिकरण और सुशासन के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। किसान, मजदूर, बुजुर्ग और महिलाएं अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बजाय अपने नजदीकी सीएससी केंद्र पर ही समाधान प्राप्त कर रहे हैं।


महिलाओं के लिए भरोसे का केंद्र

महिला संचालकों के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को विशेष सुविधाएं मिल रही हैं। महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर पा रही हैं और योजनाओं की जानकारी लेने में सहज महसूस कर रही हैं। इससे सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।


आत्मनिर्भरता की नई पहचान

सीएससी केंद्रों के संचालन से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। डिजिटल प्रशिक्षण और तकनीकी अनुभव से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। कई महिलाएं अब अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर प्रदान कर रही हैं।


सरकार की सोच, जमीन पर असर

महिलाओं को सीएससी संचालन से जोड़ने की पहल से सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘नारी सशक्तिकरण’ की सोच को वास्तविकता में बदलते हुए देखा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि महिला सहभागिता से योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता दोनों में सुधार हो रहा है।


दौसा में सीएससी चला रहीं महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि जब महिलाएं आगे आती हैं, तो विकास की गति अपने आप तेज हो जाती है।


महिलाओं के लिए सहारा

महिला संचालकों की उपस्थिति से महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को विशेष राहत मिल रही है। महिलाएं बिना संकोच अपनी समस्याएं साझा कर पा रही हैं और योजनाओं की जानकारी भी आसानी से प्राप्त कर रही हैं। यही कारण है कि सीएससी केंद्रों पर महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।


आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास

सीएससी संचालन से महिलाएं न केवल नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि तकनीकी दक्षता भी हासिल कर रही हैं। इससे उनके परिवार में भूमिका मजबूत हुई है और समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है। कई महिला संचालक अन्य महिलाओं को भी डिजिटल कार्यों का प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


प्रशासन और सरकार की सोच को आकार

जिला प्रशासन और सीएससी प्रबंधन के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। आने वाले समय में जिले में महिला संचालकों की संख्या बढ़ाने की योजना है, ताकि सरकारी योजनाओं की पहुंच और मजबूत हो सके।


कमलेश कुमार शर्मा ने बताया कि दौसा जिले में सीएससी केंद्रों का संचालन करने वाली महिलाएं जैसे ललिता मीणा, सीमा सोनी, और अन्य कई महिलाएं इस पहल का हिस्सा हैं।


डिजिटल सखी बन रहीं महिलाएं

सीएससी के माध्यम से महिलाएं न केवल पहचान बना रही हैं, बल्कि वे डिजिटल सखी और सेवा दूत के रूप में भी स्थापित हो रही हैं। इन महिला संचालकों द्वारा ई-श्रम कार्ड, पैन कार्ड, पेंशन आवेदन, और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ आम जनता को मिल रहा है।


महिलाओं के लिए सुरक्षित मंच

महिला संचालकों के कारण महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सुविधा मिल रही है। योजनाओं से जुड़ी जानकारी लेने और आवेदन कराने में वे खुद को अधिक सहज महसूस कर रही हैं। इससे सरकारी योजनाओं में महिला सहभागिता भी बढ़ी है।


नीति से जमीन तक असर

महिला सीएससी संचालकों की सफलता सरकार की उस सोच को साकार कर रही है, जिसमें डिजिटल इंडिया और नारी सशक्तिकरण को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि महिला भागीदारी से योजनाओं की पहुंच और प्रभाव दोनों में सुधार हुआ है।


दौसा की महिलाएं सीएससी के माध्यम से यह संदेश दे रही हैं कि जब अवसर और तकनीक मिलती है, तो महिलाएं बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी बन जाती हैं।