दुनिया में ऊर्जा संकट: कई देशों में लॉकडाउन की संभावना

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जिसके चलते कई देशों में एनर्जी लॉकडाउन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। फिलीपींस ने पहले ही 'नेशनल एनर्जी इमरजेंसी' घोषित कर दी है, जबकि पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों ने भी विभिन्न पाबंदियाँ लागू की हैं। यूरोप में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में ईंधन की कमी हो सकती है। जानें किस देश ने क्या कदम उठाए हैं।
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दुनिया में ऊर्जा संकट: कई देशों में लॉकडाउन की संभावना

महायुद्ध का प्रभाव

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। वर्तमान में, दुनिया 1970 के दशक के बाद के सबसे बड़े 'एनर्जी लॉकडाउन' की कगार पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव के कारण कुछ देशों को राहत मिली है, जबकि कई अन्य देशों में तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इस स्थिति के चलते, इन देशों ने पहले से ही राशनिंग और पाबंदियों को लागू करना शुरू कर दिया है।


फिलीपींस का एनर्जी लॉकडाउन

फिलीपींस ने हाल ही में एनर्जी लॉकडाउन की घोषणा की है। यह देश मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण आधिकारिक तौर पर 'नेशनल एनर्जी इमरजेंसी' घोषित करने वाला पहला देश बन गया है। फिलीपींस की स्थिति गंभीर है, क्योंकि यह अपनी आवश्यकताओं का 98% तेल खाड़ी देशों से आयात करता है।


लॉकडाउन के दौरान लागू पाबंदियाँ

राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के निर्देश पर, मनीला और अन्य बड़े शहरों में शॉपिंग मॉल्स के खुलने का समय कम कर दिया गया है ताकि बिजली की बचत हो सके। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और डीजल की कीमतें 220 रुपए प्रति लीटर तक पहुँच गई हैं। सरकार ने एक बार में तेल भरवाने की सीमा भी निर्धारित कर दी है।


अन्य देशों की स्थिति

पाकिस्तान में स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद कर दिया गया है और वर्क-फ्रॉम-होम अनिवार्य किया गया है। श्रीलंका ने ईंधन की बचत के लिए हर बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। बांग्लादेश में बिजली की कटौती शुरू हो गई है और स्कूलों में छुट्टियाँ समय से पहले घोषित की गई हैं। वियतनाम में पेट्रोल की कीमतों में 50-60% की वृद्धि के बाद गैर-जरूरी यात्राओं पर पाबंदी लगाई गई है।


यूरोप में स्थिति

यूरोप फिलहाल अपनी सुरक्षित गैस भंडार पर निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल 2026 तक स्थिति बिगड़ सकती है। जर्मनी की अर्थव्यवस्था मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध जारी रहा, तो अप्रैल या मई में ईंधन की भारी कमी हो सकती है। यूरोपीय संघ की बड़ी कंपनियों ने भी चेतावनी दी है कि जल्द ही डीजल और जेट फ्यूल की राशनिंग शुरू हो सकती है।