दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों में यूनिफॉर्म के लिए नकद सहायता की नीति को बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और वंचित समूहों के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले के लिए स्कूल यूनिफॉर्म के लिए नकद सहायता प्रदान करने की दिल्ली सरकार की नीति को मान्यता दी है। अदालत ने कहा कि यह निर्णय न तो मनमाना है और न ही पूरी तरह अनुचित। इसके साथ ही, न्यायालय ने गैर-सरकारी संगठन ‘जस्टिस फॉर ऑल’ द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय के बाद, दिल्ली सरकार की वह व्यवस्था जारी रहेगी, जिसके तहत पात्र बच्चों को स्कूल की वर्दी के लिए सीधे आर्थिक सहायता दी जाती है।
पुनर्विचार याचिका का खारिज होना
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति रेनू भटनागर की पीठ ने कहा कि पुनर्विचार याचिका में उठाए गए मुद्दे पहले ही निपटाए जा चुके हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सरकारी नीति में न्यायिक हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है जब वह स्पष्ट रूप से मनमानी या अनुचित हो। मौजूदा मामले में बच्चों को तैयार यूनिफॉर्म देने के बजाय नकद सहायता उपलब्ध कराने की सरकार की नीति इस कसौटी पर खरी नहीं उतरती।
यूनिफॉर्म के लिए नकद सहायता की आवश्यकता
याचिकाकर्ता संगठन ‘जस्टिस फॉर ऑल’ ने अदालत से अनुरोध किया था कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित समूहों के बच्चों को निजी स्कूलों में यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जानी चाहिए। संगठन का तर्क था कि सरकार को वर्दी खरीदने के लिए सीधे नकद राशि देने के बजाय बच्चों को तैयार यूनिफॉर्म मुहैया करानी चाहिए।
दिल्ली सरकार ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे का नाप लेना और यूनिफॉर्म तैयार कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है। इस प्रक्रिया में समय और प्रशासनिक संसाधनों की अधिक आवश्यकता होती है।
समय पर यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की चुनौती
दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले भी इस नीति को सही ठहराया था। अदालत ने कहा था कि बच्चों के लिए यूनिफॉर्म तैयार करना और उसे समय पर वितरित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।
अदालत ने यह भी माना कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से यूनिफॉर्म के लिए नकद सहायता देना शिक्षा के अधिकार कानून के विपरीत नहीं है।
पुनर्विचार याचिका पर अदालत का निर्णय
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार की नीति पर पहले ही विचार किया जा चुका है और याचिका में कोई नया आधार नहीं है। इस निर्णय के साथ, दिल्ली सरकार की यूनिफॉर्म सहायता नीति को न्यायिक समर्थन मिला है।
