दिल्ली हाईकोर्ट ने CJP नेताओं को बैरिकेड तोड़ने पर फटकार लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका के वकील अभिक चिमनी से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश और जमानत बांड के उल्लंघन के मामले में वकील से स्पष्टीकरण मांगा।
सौरभ दास और आशुतोष रांका ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने वाले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 11 अक्टूबर को जमानत बांड भरे थे, उसी दिन जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में रद्द किया गया था, जिसके बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने पूछा कि जमानत बांड के उल्लंघन के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया।
10 अक्टूबर को दास और रांका को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 से हिरासत में लिया गया था। BNSS की धारा 126 और 170 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई थी और दोनों ने 50,000-50,000 के जमानत बांड भरे थे।
11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की प्रदर्शन स्थल की मान्यता रद्द कर दी। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में अलग से चुनौती दी गई है।
ताजा मामला दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा 19 अक्टूबर को दिए गए उस आदेश से संबंधित है, जिसमें दोनों की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी। मजिस्ट्रेट ने सार्वजनिक शांति और सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा था कि CJP नेता बार-बार डी-नोटिफाइड स्थलों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा, "जब आपके जमानत बांड स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो बांड टूटने पर BNSS में एक तय प्रक्रिया है। उस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय, शायद वे आपको नया नोटिस देकर अधिक दरियादिली दिखा रहे हैं।"
उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे विरोध प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।
कोर्ट ने अन्य देशों में हुई हिंसा का हवाला देते हुए कहा, "बैरिकेड किसी मकसद से लगाए जाते हैं... और जब आप बैरिकेड तोड़ते हैं, तो अन्य लोगों के वहां घुसने की संभावना बढ़ जाती है।"
कोर्ट ने आगे कहा, "हम देख रहे हैं कि हमारे देश के बाहर क्या हो रहा है... आगजनी आदि। आपको पुलिस की अनुमति लेनी होती है ताकि असामाजिक तत्वों को आपके समूह में शामिल होने से रोका जा सके।"
प्रदर्शन के हालातों पर सवाल उठाते हुए अदालत ने वकील चिमनी से पूछा, "आप वहां गए, बैरिकेड तोड़ा... बिना इजाजत के। हम बस यह देखना चाहते हैं कि यहां हो क्या रहा है? क्या यह (SEM का आदेश) पुनर्निरीक्षण योग्य आदेश है?"
कोर्ट ने वकील से यह भी पूछा, "आप अपने तर्कों को बचाकर क्यों नहीं रखते? पहले रिवीजन कोर्ट के सामने और फिर हाईकोर्ट। क्या आप आज ऐसी स्थिति में अपनी ताकत नहीं आजमा रहे हैं जहाँ कानूनन इसकी जरूरत ही नहीं है?"
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दास और रांका की उम्र पूछी, जिस पर चिमनी ने बताया कि सौरभ 27 वर्ष के हैं और आशुतोष 32 वर्ष के हैं।
इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की, "फिर आप 'जेन-ज़ी' नहीं हैं। अदालत को बताया गया है कि 1997 के बाद पैदा हुए लोग जेन-ज़ी हैं, तो फिर आप जेन-ज़ी की श्रेणी में नहीं आते।"
