दिल्ली हाई कोर्ट ने युवक की बहाली पर सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
दिल्ली पुलिस की नियुक्ति में मिली राहत
दिल्ली पुलिस हैड क्वार्टर (फाइल फोटो)
दिल्ली पुलिस ने एक युवक को हिंसक बताकर उसकी नियुक्ति रोक दी थी। युवक ने इस मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अंततः उसे न्याय मिला। आठ साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, युवक को बहाली का अवसर मिला है। न्यायालय ने कहा कि जिस मामले में युवक पहले ही बरी हो चुका है, उसे हिंसक प्रवृत्ति के आधार पर नियुक्ति से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए युवक की जॉइनिंग कराने का आदेश दिया है।
2016 में, दिल्ली पुलिस ने भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। हरियाणा के एक युवक ने आवेदन किया, लेकिन उसके खिलाफ अक्टूबर 2016 में दंगा और मारपीट का मामला दर्ज किया गया। इस दौरान, युवक ने फिजिकल और रिटन टेस्ट पास कर लिया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले, युवक को दंगा और मारपीट के मामले में बरी कर दिया गया।
हिंसक प्रवृत्ति का आरोप
बरी होने के बावजूद, जब जॉइनिंग का समय आया, तो युवक को यह कहकर मना कर दिया गया कि वह हिंसक प्रवृत्ति का है। युवक ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की और अपनी बात रखी। लगभग आठ साल बाद, न्यायमूर्ति मधु जैन और न्यायमूर्ति नवीन चावला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए नाराजगी व्यक्त की और कहा कि युवक ने सभी भर्ती मापदंड पूरे किए हैं। लेकिन उसे हिंसक बताकर नियुक्ति खारिज करना गलत था।
बरी होने का महत्व
हाई कोर्ट ने कहा कि युवक पहले ही मारपीट और दंगे के मामले में बरी हो चुका है। ऐसे में उसकी नियुक्ति को रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मामूली कहासुनी पर हुई मारपीट को हिंसक प्रवृत्ति नहीं कहा जा सकता। कई बार ऐसी परिस्थितियाँ बन जाती हैं, और आरोपी पहले ही बरी हो चुका है। कोर्ट से बरी होना किसी भी आरोप के कलंक से मुक्त होना है।
जॉइनिंग लेटर का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि युवक को 2018 का नियुक्ति पत्र दिया जाए और उसी के अनुसार उसकी सैलरी में बढ़ोतरी और सीनियरिटी दी जाएगी। हालांकि, युवक को पिछले आठ साल की सैलरी नहीं मिलेगी, लेकिन अन्य लाभ विभाग द्वारा प्रदान किए जाएंगे।
