नई दिल्ली। देशभर में कई लोग अतिरिक्त आय के लिए अपने मकान को किराए पर देते हैं। कभी-कभी किराएदार जल्दी मकान छोड़ने के लिए तैयार नहीं होते, जिससे मकान मालिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हाल ही में, दिल्ली हाई कोर्ट ने एक किराएदार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में बड़ा झटका दिया है।
किराएदार ने एक मकान किराए पर लिया था, लेकिन उसने दावा किया कि वह वहां नहीं रह रहा, बल्कि उसकी पत्नी वहां रह रही है और उसने ताला लगा दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि किराएदार इस दावे के जरिए अपनी कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। न्यायालय ने कहा कि यदि परिवार का कोई सदस्य वहां रह रहा है, तो इसे किराएदार का कब्जा माना जाएगा।
लाइव लॉ के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट की जज नीना बंसल ने कहा, "जब कोई व्यक्ति अपने परिवार के साथ किराए पर रहता है, तो उसके परिवार के किसी सदस्य का वहां रहना भी किराएदार के कब्जे में ही आता है।" जज ने किराएदार की अपील को खारिज करते हुए उसे कड़ा संदेश दिया।
यह मामला तब शुरू हुआ जब मकान मालिक ने अपनी संपत्ति वापस मांगी। किराएदार ने कहा कि अब वह वहां नहीं रह रहा, बल्कि उसकी पत्नी वहां रह रही है, जिसने ताला लगा दिया है। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि पत्नी किराएदार के परिवार का सदस्य है, इसलिए उसे स्वतंत्र रूप से किराएदारी का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने किराएदार को फटकार लगाते हुए कहा, "यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। उसका मकसद मकान मालिक के अधिकारों को समाप्त करना है।" अंततः, कोर्ट ने किराएदार की अपील को खारिज कर दिया और बेदखली के आदेश को सही ठहराया।
