दिल्ली हाई कोर्ट ने RML अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने RML अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के चालू न होने पर केंद्र, अस्पताल और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद कानूनी मंजूरी में देरी हो रही है, जिससे हजारों मरीज आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं। अगली सुनवाई 3 अगस्त, 2026 को होगी।
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दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार, डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल और दिल्ली सरकार को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि RML अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का निर्माण काफी हद तक पूरा हो चुका है, फिर भी इसे चालू नहीं किया गया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर स्पष्टीकरण मांगा है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दिल्ली फायर सर्विस को भी इस मामले में प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है, क्योंकि इस सुविधा को चालू करने में कानूनी फायर सेफ्टी मंजूरी भी आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त, 2026 को निर्धारित की गई है।


NGO द्वारा दायर जनहित याचिका

यह जनहित याचिका NGO 'सोशल ज्यूरिस्ट' ने वकील अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष के माध्यम से दायर की है। इसमें मांग की गई है कि सभी आवश्यक कानूनी मंजूरी जैसे कंप्लीशन और सेफ्टी सर्टिफिकेट को तुरंत प्राप्त किया जाए और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को जल्द से जल्द चालू किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर वकील सत्यकाम और अशोक अग्रवाल ने बताया कि इस ब्लॉक के निर्माण में जनता का लगभग ₹400 करोड़ खर्च हुआ है।


सुविधाओं की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव

याचिकाकर्ता के अनुसार, इस सुविधा में लगभग 666 बेड, उन्नत ऑपरेशन थिएटर और विशेष स्वास्थ्य सेवाएं शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन कानूनी मंजूरी में देरी और प्रशासनिक कमियों के कारण यह अभी तक चालू नहीं हो पाई है।


याचिकाकर्ता का तर्क है कि इंफ्रास्ट्रक्चर का काम काफी हद तक पूरा होने के बावजूद, इस देरी के कारण हजारों मरीज आवश्यक चिकित्सा सेवाओं से वंचित रह गए हैं।


याचिका में यह भी कहा गया है कि इस सुविधा को चालू करने में हो रही लंबी देरी से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा कमजोर होता है और इस प्रोजेक्ट पर हुए खर्च के बावजूद सरकारी संसाधनों की बर्बादी होती है।