दिल्ली सरकार ने अस्पताल परियोजनाओं के लिए लागत अनुमानों को दी मंजूरी

दिल्ली सरकार की व्यय वित्त समिति ने तीन अस्पताल परियोजनाओं के लिए संशोधित लागत अनुमानों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में, लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के विस्तार के लिए लागत को 1,268.85 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की गई। इसके अलावा, मादीपुर और ज्वालापुरी अस्पतालों के लिए भी लागत अनुमानों को स्वीकृति दी गई। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में।
 | 
gyanhigyan

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक

नई दिल्ली, 5 अगस्त: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में दिल्ली सरकार की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने तीन अस्पताल परियोजनाओं के लिए संशोधित लागत अनुमानों को स्वीकृति प्रदान की है। समिति ने लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल के विस्तार कार्य के लिए मध्यस्थता अधिकरण के तहत 94 करोड़ रुपये के भुगतान की प्रक्रिया की सतर्कता जांच के निर्देश भी दिए हैं। हाल ही में हुई बैठक में, ईएफसी ने स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए लोक नायक अस्पताल में नए ब्लॉक के निर्माण की लागत को 533.91 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,268.85 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की।


कैबिनेट के समक्ष पेश होगा संशोधित अनुमान

संशोधित लागत अनुमान अब कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। समिति ने एलएनजेपी अस्पताल से संबंधित मध्यस्थता अधिकरण के फैसले के तहत किए गए भुगतान की प्रक्रिया की सतर्कता जांच कराने का आदेश दिया है। समिति का मानना है कि इसी कारण परियोजना की लागत में वृद्धि हुई है।


मादीपुर और ज्वालापुरी अस्पताल परियोजनाओं की मंजूरी

अधिकारियों ने बताया कि ईएफसी ने मादीपुर और ज्वालापुरी अस्पताल परियोजनाओं के लिए भी संशोधित अनुमानों को मंजूरी दी है। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह मध्यस्थता अधिकरण के फैसले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे और यह जांच करे कि क्या पिछले ठेकेदार के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके साथ ही, अस्पताल परियोजनाओं से संबंधित सतर्कता विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) की जांच की ताजा स्थिति भी प्राप्त की जाए। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, एलएनजेपी अस्पताल परियोजना को 2019 में 533.91 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृति मिली थी।


निर्माण कार्य में विवाद

इस परियोजना के तहत औषधि, मातृत्व और उन्नत बाल चिकित्सा सेवाओं के लिए दो बेसमेंट और 22 मंजिला भवन का निर्माण होना था, जिससे अस्पताल में 1,570 बिस्तरों की वृद्धि होती। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा था, लेकिन संविदात्मक शर्तों और संरचनात्मक स्टील के भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। ठेकेदार ने अनुबंध के तहत विवाद समाधान प्रक्रिया का उपयोग किया, जिसके बाद मध्यस्थता अधिकरण ने उसके पक्ष में निर्णय सुनाया।


दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख

विभाग के अनुसार, ठेकेदार ने मध्यस्थता अधिकरण के निर्णय के कार्यान्वयन के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसके बाद राशि जारी की गई और अदालत ने इसकी वसूली के लिए पीडब्ल्यूडी स्वास्थ्य ज़ोन के खातों को कुर्क कर लिया। विभाग ने समिति को बताया कि 586.09 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं और परियोजना 55 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। संशोधित लागत अनुमान 1,268.85 करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें शेष कार्य पूरा करने के लिए आवश्यक 682.75 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।


लागत में वृद्धि के कारण

लागत में यह बढ़ोतरी मध्यस्थता अधिकरण के फैसले, जीएसटी दर में वृद्धि, निर्माण सामग्री और श्रम लागत में बढ़ोतरी, और कोविड-19 महामारी के बाद अस्पताल सेवाओं में किए गए परिवर्तनों के कारण हुई है। समिति ने उल्लेख किया कि मध्यस्थता अधिकरण ने 94.61 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया था। इसी बैठक में, ईएफसी ने 691 बिस्तरों वाले मादीपुर अस्पताल परियोजना के लिए 466.50 करोड़ रुपये के संशोधित लागत अनुमान को भी मंजूरी दी।


ज्वालापुरी अस्पताल परियोजना की स्थिति

इसमें शेष कार्य के लिए 203.60 करोड़ रुपये शामिल हैं। समिति ने ज्वालापुरी अस्पताल परियोजना के लिए भी 484.04 करोड़ रुपये के संशोधित लागत अनुमान को मंजूरी दी। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि इन दोनों अस्पतालों का काम 65-65 प्रतिशत पूरा हो चुका है।