दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड का पुनर्गठन: पर्यावरण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
दिल्ली के ग्रीन इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए नया कदम
दिल्ली की राजधानी में ग्रीन इकोसिस्टम को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। उपराज्यपाल टीएस संधू ने दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड के पुनर्गठन और इसकी नई अधिसूचना को मंजूरी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप निर्णय
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध मामले ‘टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ’ के फैसले और पर्यावरण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी एजेंसियों को एकत्रित करके दिल्ली के पर्यावरण संतुलन, जलवायु लचीलेपन और संवेदनशील ‘रिज’ क्षेत्र की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नया ढांचा
दिल्ली के रिज क्षेत्र की भूमि का स्वामित्व दिल्ली विकास प्राधिकरण के पास है, जबकि इसके रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के पर्यावरण और वन विभाग की है। सुरक्षा और नियमों के कार्यान्वयन का कार्य विभिन्न एजेंसियों जैसे दिल्ली नगर निगम, एनडीएमसी, राजस्व विभाग और दिल्ली पुलिस के पास है। इस बिखराव को समाप्त करने के लिए, नए ढांचे के तहत दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को इस बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
विशेषज्ञों की भागीदारी
बोर्ड की कार्यप्रणाली को और अधिक वैज्ञानिक और शोध-आधारित बनाने के लिए इसमें गैर-सरकारी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी अरविंद माधव सिंह और सेंटर फॉर सस्टेनेबल ग्रीन इकोनॉमी के सीईओ मालविका कौल को बोर्ड में सदस्य के रूप में नामांकित किया गया है।
त्वरित कार्रवाई के लिए स्टैंडिंग कमेटी
अवैध कब्जों और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई के लिए बोर्ड के अधीन एक विशेष स्टैंडिंग कमेटी भी बनाई जाएगी। यह कमेटी मुख्य दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत कार्य करेगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
