दिल्ली में सिम बिक्री घोटाले में एरिया सेल्स मैनेजर को मिली जमानत
दिल्ली की अदालत का फैसला
दिल्ली की एक अदालत ने दूरसंचार कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर बिनु विद्याधरन को सिम बिक्री घोटाले के मामले में जमानत प्रदान की है। अदालत का मानना है कि आगे की हिरासत से कोई लाभ नहीं होगा, क्योंकि सभी महत्वपूर्ण सबूत पहले से ही जांच एजेंसी के पास मौजूद हैं। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है।
जमानत की शर्तें
अदालत ने सीबीआई की 14 दिन की न्यायिक हिरासत की याचिका को खारिज करते हुए, विद्याधरन को 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानती पेश करने पर कड़ी शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामले की सुनवाई
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने दो आवेदनों पर एक साथ सुनवाई की। इनमें से एक आवेदन सीबीआई द्वारा न्यायिक हिरासत की मांग के लिए था, जबकि दूसरा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 480 के तहत आरोपी द्वारा जमानत की मांग के लिए दायर किया गया था।
सीबीआई की कार्रवाई
आरोपी की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार, विपिन कुमार, प्रियंका सिंह, अरुणेश गुप्ता और तरंग अग्रवाल ने अदालत में पेशी दी, जबकि सीबीआई की ओर से अभियोजक उपस्थित हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने सीबीआई का आवेदन खारिज कर दिया और जमानत याचिका को मंजूर कर लिया।
ऑपरेशन चक्र-V
यह मामला सीबीआई के ऑपरेशन चक्र-V का हिस्सा है, जिसके तहत एजेंसी ने 8 जनवरी, 2026 को विद्याधरन को सिम कार्ड की कथित अवैध बिक्री के आरोप में गिरफ्तार किया था। इन सिम कार्डों का उपयोग बाद में साइबर अपराधों में किया गया था।
संगठित फ़िशिंग नेटवर्क का खुलासा
दिसंबर 2025 में, सीबीआई ने दिल्ली और चंडीगढ़ के आसपास एक संगठित फ़िशिंग नेटवर्क का पता लगाया था, जो विदेशी तत्वों सहित साइबर अपराधियों को बल्क एसएमएस सेवाएं प्रदान कर रहा था। सीबीआई के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करते हुए लगभग 21,000 सिम कार्ड खरीदे गए थे, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा फ़िशिंग गतिविधियों के लिए किया गया।
