दिल्ली में संसद के मॉनसून सत्र की तैयारी, नए बिलों पर चर्चा

दिल्ली में संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। विपक्ष बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है, जबकि केंद्र सरकार नए विधेयकों को पारित कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस सत्र में पांच नए बिलों के पेश होने की संभावना है, साथ ही कुछ लंबित बिलों पर भी चर्चा की जाएगी। राजनीतिक माहौल गरमाने की उम्मीद है, जिससे संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
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gyanhigyan

दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों का उफान

दिल्ली, देश की राजधानी, में राजनीतिक हलचलें अपने चरम पर हैं, क्योंकि संसद का मॉनसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। इस सत्र के लिए सत्ताधारी एनडीए और विपक्ष दोनों अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और NEET पेपर लीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है, जबकि केंद्र सरकार महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को बिना किसी रुकावट के पारित कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस बीच, सत्र में पेश होने वाले संभावित बिलों की आधिकारिक सूची भी जारी की गई है।


नए बिलों की संभावित सूची

पांच नए बिलों का प्रस्ताव


सूत्रों के अनुसार, सरकार मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में निम्नलिखित पांच नए बिल पेश करने की योजना बना रही है:


  • इनकम टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 - एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए।
  • सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 - एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026।
  • राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026।


इन बिलों को सत्र के दौरान सरकार के विधायी एजेंडे का मुख्य हिस्सा माना जा रहा है।


लंबित बिलों पर चर्चा

सरकार के एजेंडे में दो लंबित बिल शामिल


नए कानूनों के अलावा, केंद्र सरकार उन दो बिलों पर भी विचार कर सकती है जो पहले से ही संसद में लंबित हैं: विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026, जिसे 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025, जिसे 15 दिसंबर, 2025 को पेश किया गया था।


परिसीमन और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव'

राजनीतिक चर्चा के मुख्य विषय


हालांकि सरकार की आधिकारिक विधायी सूची में परिसीमन बिल या 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' बिल शामिल नहीं है, लेकिन ये दोनों प्रस्ताव सत्र से पहले राजनीतिक चर्चा के प्रमुख विषय बन गए हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि केंद्र सरकार इन कानूनों को पेश करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यदि संसद में परिसीमन की प्रक्रिया का बिल लाया जाता है, तो वह इसका विरोध करेगी।


सरकार और विपक्ष की बैठकें

तैयारियों की समीक्षा


सरकार की तैयारियों के तहत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार सुबह 11 बजे अपने आवास पर मंत्रियों के समूह (GoM) की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में मॉनसून सत्र के लिए तालमेल और विधायी रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी अपनी तैयारियों को तेज कर रहे हैं। कई आंतरिक बैठकें पहले से ही चल रही हैं, और संसद के दोबारा शुरू होने से एक दिन पहले, 19 जुलाई को विपक्षी दलों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई है।


मॉनसून सत्र से अपेक्षाएँ

संसद में गरमागरम बहस की संभावना


आने वाले सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। जहां सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा में गड़बड़ियों और अन्य जनहित मुद्दों को उठाने का प्रयास करेगा, जिससे संसद का राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है।