दिल्ली में वंदे मातरम की 150वीं जयंती का भव्य आयोजन
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारती दीक्षित ने ओजपूर्ण गाथा प्रस्तुत की। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम के महत्व को दर्शाया गया। कार्यक्रम में कई साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। जानें इस भव्य आयोजन की खास बातें और वंदे मातरम के ऐतिहासिक सफर के बारे में।
| May 23, 2026, 18:47 IST
वंदे मातरम की विशेष प्रस्तुति
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती और दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के सहयोग से वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर शनिवार को चांदनी चौक स्थित दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी में ‘वंदे मातरम् गाथा’ नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध किस्सागो और चित्रकार भारती दीक्षित ने वंदे मातरम की गाथा को ओजपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखे गए इस गीत को 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंद मठ’ में शामिल किया गया था, जहां संन्यासी भवानंद इसे गाते हैं। यह गीत बाद में संन्यासियों के लिए राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया।
भारती दीक्षित ने वंदे मातरम से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को किस्सागोई के माध्यम से साझा किया। उन्होंने बताया कि 1896 में कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में युवा कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के गान ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह गीत 1906 में फिर से गाया गया और इसे राष्ट्रीय पहचान मिली। बंगाल विभाजन के खिलाफ यह गीत एकता का प्रतीक बन गया।
भारती दीक्षित ने स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम के महत्व को भी दर्शाया, जिससे श्रोता भावुक हो गए। 50 मिनट की इस प्रस्तुति ने सभी को बांधकर रखा।
कार्यक्रम की शुरुआत में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने वंदे मातरम की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रावण पर विजय के बाद विभीषण ने भगवान श्रीराम से श्रीलंका में रुकने का आग्रह किया था, जिस पर श्रीराम ने कहा कि 'जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।' उन्होंने यह भी बताया कि वंदे मातरम का भाव अथर्ववेद में भी विद्यमान है।
कार्यक्रम का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने किया। परिषद् गीत सुनीता बुग्गा ने प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन आरके पुरम विभाग के अध्यक्ष मलखान सिंह ने दिया। इस अवसर पर कई साहित्यकारों और विद्यार्थियों की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।
