दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन: प्रशासन की चूक पर उठे सवाल
दिल्ली में जन-आंदोलनों की परंपरा
2012 का निर्भया आंदोलन, 2021 की ट्रैक्टर रैली, और अब 2026 का यह विरोध प्रदर्शन, दिल्ली ने पिछले 15 वर्षों में कई महत्वपूर्ण जन-आंदोलनों का सामना किया है। हाल ही में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस की खुफिया व्यवस्था और प्रशासनिक तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का सही आकलन पुलिस नहीं कर पाई, जिसके परिणामस्वरूप भीड़ को नियंत्रित करने में विफलता हुई और लगभग 200 लोग घायल हो गए।
कहां हुई चूक?
यह पहले से ज्ञात था कि 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च आयोजित किया जाएगा, जो CJP का एक महीना पुराना आंदोलन था। इसके बावजूद, हजारों प्रदर्शनकारी संसद के दरवाजे तक पहुँचने में सफल रहे, जिसके बाद उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया। पुलिस के अनुसार, घायलों की संख्या 118 थी, जो प्रदर्शनकारियों की संख्या का सही अनुमान लगाने में उनकी विफलता को दर्शाता है।
कॉकरोच प्रोटेस्ट की शुरुआत
CJP ने संसद तक मार्च करने का आह्वान लगभग तीन हफ्ते पहले किया था। यह आंदोलन अभिजीत दिपके द्वारा शुरू किया गया था। 28 जून को, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए भूख हड़ताल शुरू की। प्रारंभिक हफ्तों में इस आंदोलन को ज्यादा समर्थन नहीं मिला, लेकिन 18 जुलाई को पुलिस द्वारा वांगचुक को हटाने के बाद, आंदोलन को और मजबूती मिली। जंतर-मंतर पर समर्थन दिखाने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए, और रविवार शाम तक, प्रदर्शनकारियों की संख्या 3,000 से बढ़कर लगभग 5,000 हो गई।
प्रशासन की रणनीति पर सवाल
दिल्ली पुलिस ने कहा कि CJP ने संसद तक मार्च निकालने के लिए न तो अनुमति मांगी थी और न ही कोई मंजूरी प्राप्त की थी। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। छात्र, माता-पिता और युवा पेशेवर विभिन्न क्षेत्रों से आए थे, जिनमें कई किशोर भी शामिल थे। कई महिला प्रदर्शनकारी और छात्र आस-पास के राज्यों से समूहों में दिल्ली आए। जंतर-मंतर से उठी विरोध की लहर ने प्रशासन के सभी दावों को चुनौती दी। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों को लगा था कि यह प्रदर्शन समय के साथ कमजोर हो जाएगा, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, मेट्रो के 5 स्टेशन बंद करने पड़े और आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
