दिल्ली में किसानों की महापंचायत: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन
शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा कड़े इंतजाम
पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर हालात एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। दिल्ली में होने वाली एक दिवसीय राष्ट्रीय 'महापंचायत' में भाग लेने के लिए किसानों के समूहों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, शंभू बॉर्डर को फिर से बंद कर दिया गया है। सुरक्षा के लिए सीमेंट के बड़े स्लैब रखकर रास्ते को अवरुद्ध किया गया है। यह महापंचायत 'देश बचाओ मोर्चा' के तत्वावधान में दिल्ली के ऐतिहासिक किसान घाट पर आयोजित की जा रही है। आयोजकों का दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 550 किसान और सामाजिक संगठन शामिल होंगे.
महापंचायत का उद्देश्य
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब पंजाब से किसानों का एक बड़ा जत्था रविवार को दिल्ली के लिए रवाना हुआ, ताकि 21 जुलाई को प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ महापंचायत में भाग ले सकें। 'देश बचाओ मोर्चा' द्वारा आयोजित इस महापंचायत में देशभर से लगभग 550 किसान यूनियन और सामाजिक संगठन भाग लेने की योजना बना रहे हैं.
किसानों की चिंताएं
किसान मज़दूर संघर्ष समिति पंजाब के नेता जर्मनजीत सिंह बंडाला ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय किसानों, मज़दूरों, छोटे व्यापारियों और आम जनता पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों और किसानों को लाभ पहुंचाना है, जबकि भारत के छोटे और सीमांत किसानों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
आंदोलन की चेतावनी
बंडाला ने कहा कि पंजाब के किसान, अन्य राज्यों के प्रतिभागियों के साथ, 21 जुलाई की महापंचायत में शामिल होंगे। यदि अधिकारियों ने उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका, तो वे वहीं शांतिपूर्ण सभा करेंगे और अपनी चिंताओं के बारे में जागरूकता फैलाते रहेंगे.
केंद्र सरकार को चेतावनी
बंडाला ने यह भी कहा कि यह विरोध प्रदर्शन "सिर्फ शुरुआत है," और यदि केंद्र सरकार ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द नहीं किया और किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. किसान संगठन तब तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं.
किसानों की मांगें
किसान मज़दूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के किसान रैली में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे। यह रैली 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले आयोजित की जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत भारत में सस्ते कृषि उत्पादों के आयात की अनुमति देने से किसानों, खेतिहर मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
केंद्र से दखल की मांग
पांधेर ने कहा कि प्रस्तावित समझौता केवल कुछ चीज़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवा क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं. किसानों ने केंद्र से तुरंत दखल देने की मांग की है और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने का आग्रह किया है.
