दिल्ली में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति के खिलाफ विरोध मार्च की तैयारी

दिल्ली के परिवहन संगठनों ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति के खिलाफ चार अगस्त को संसद तक विरोध मार्च का आयोजन करने की घोषणा की है। इस मार्च का उद्देश्य सांसदों को जागरूक करना है, क्योंकि एथनॉल मिश्रण के कारण वाहनों में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन राजनीतिक नहीं है और वे उपभोक्ताओं के लिए विकल्प की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर लंबे समय से विवाद चल रहा है, जिसमें वाहनों की माइलेज में कमी और इंजन के खराब होने की आशंका शामिल है।
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दिल्ली में एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति के खिलाफ संगठनों का विरोध

नई दिल्ली, 27 जुलाई: दिल्ली के परिवहन से जुड़े विभिन्न संगठनों ने एथनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति को समाप्त करने की मांग को लेकर चार अगस्त को संसद की ओर एक विरोध मार्च आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस आह्वान को ‘दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन’ और अन्य समूहों ने किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा, “हम चार अगस्त को संसद तक विरोध मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं, ताकि सांसदों को इस मुद्दे पर जागरूक किया जा सके, क्योंकि एथनॉल मिश्रण के कारण देशभर में वाहनों में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।”


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना नहीं है और न ही उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध है। वह ई-20 ईंधन के खिलाफ चल रहे ऑनलाइन आंदोलन का उल्लेख कर रहे थे, जिसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। ‘ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने कहा कि वह सरकार के उस निर्णय के खिलाफ हैं, जिसमें ई-20 ईंधन को उपभोक्ताओं के लिए एकमात्र विकल्प बनाया जा रहा है।


उन्होंने कहा, “हमने यह स्पष्ट किया है कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को यात्रियों पर जबरदस्ती नहीं थोपना चाहिए। लोगों को विकल्प मिलना चाहिए, लेकिन वर्तमान में ऐसा कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। हम संसद तक होने वाले विरोध मार्च का समर्थन कर रहे हैं।” एसोसिएशन ने अभी तक किसी हड़ताल का आह्वान नहीं किया है।


‘ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन’ के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है। इससे वाहनों को नुकसान हो रहा है। हमें उम्मीद है कि सरकार ई-20 मिश्रित पेट्रोल को यात्रियों के लिए वैकल्पिक बनाएगी।” सोशल मीडिया पर ‘ई-20 जनता पार्टी’ नामक ऑनलाइन आंदोलन के शुरू होने के कुछ दिनों बाद इस विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है।


यह आंदोलन ‘कॉजपा’ की तर्ज पर शुरू किया गया है और इसे ‘इंस्टाग्राम’ और ‘एक्स’ पर बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ है। ई-20 एथनॉल मिश्रण नीति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है, जो मुख्य रूप से वाहनों की माइलेज में कमी, इंजन के खराब होने की आशंका और हितों के टकराव के आरोपों से संबंधित है।