दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली दंगों के संदर्भ में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया। यह निर्णय 2020 में हुए दंगों से संबंधित मामले में आया है, जिसमें दोनों पर UAPA के तहत साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इन दंगों में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस फैसले पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इसे न्याय की हत्या करार दिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'सुप्रीम कंटेम्प्ट ऑफ इंडिया, मिसकैरेज ऑफ जस्टिस।'
अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं है। पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद और कार्यकर्ता शरजील इमाम लंबे समय से जेल में हैं। इस फैसले ने मानवाधिकार संगठनों में हलचल पैदा कर दी है, जबकि सरकारी पक्ष ने इसे कानून की जीत बताया। सुनवाई जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने की। दोनों आरोपियों ने लंबी हिरासत को उनके अधिकारों का उल्लंघन बताया, लेकिन अदालत ने सबूतों के आधार पर उनकी याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों से संबंधित है, जहां भाषणों को दंगे भड़काने का कारण माना गया।
दिल्ली दंगों का मुख्य साजिशकर्ता
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। उनके खिलाफ यूएपीए और आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2 सितंबर को दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपियों ने शीर्ष अदालत का रुख किया।
