दिल्ली कोर्ट ने शरजील इमाम की पेन ड्राइव अर्ज़ी पर सुनवाई की

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम की पेन ड्राइव में अध्ययन सामग्री तक पहुँचने की अर्ज़ी पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि सामग्री का नियंत्रण केवल जेल सुपरिटेंडेंट के पास है। इमाम ने अपनी PhD थीसिस के लिए सामग्री का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने इसे रोक दिया है। जानें इस मामले में कोर्ट का क्या निर्णय आया है और इमाम की स्थिति क्या है।
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दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट का निर्णय

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को शरजील इमाम की अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए कहा कि पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री को नियंत्रित और मॉनिटर करने का अधिकार केवल जेल सुपरिटेंडेंट के पास है। कोर्ट ने इमाम की मांग पर विचार करने का निर्णय जेल सुपरिटेंडेंट की मर्ज़ी पर छोड़ दिया। शरजील इमाम ने अपनी PhD थीसिस के लिए पेन ड्राइव में मौजूद अध्ययन सामग्री तक पहुँचने की अनुमति मांगी थी।


जज का बयान

एडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी ने स्पष्ट किया कि केवल जेल प्रशासन ही आवेदक द्वारा सामग्री के उपयोग को नियंत्रित और मॉनिटर कर सकता है। कोर्ट ने आवेदक की अर्ज़ी पर विचार करने का निर्णय जेल सुपरिटेंडेंट की मर्ज़ी पर छोड़ दिया।


शरजील इमाम की अर्ज़ी

शरजील इमाम ने अपने वकील अहमद इब्राहिम के माध्यम से यह अर्ज़ी दायर की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें पेन ड्राइव में मौजूद रिसर्च सामग्री का उपयोग करने की अनुमति दी जाए, ताकि वे जेल में कंप्यूटर पर उसका उपयोग कर सकें और अपनी PhD पूरी कर सकें। वकील ने बताया कि पहले जेल नंबर 1 के सुपरिटेंडेंट ने उन्हें पेन ड्राइव में आवश्यक सामग्री रखने की अनुमति दी थी, लेकिन नए सुपरिटेंडेंट ने इसे रोक दिया है।


जेल प्रशासन की चिंताएँ

डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने कहा कि यदि सामग्री किताबों या प्रिंटआउट के रूप में होती, तो समस्या कम होती, लेकिन पेन ड्राइव में डेटा का आकार बहुत बड़ा हो सकता है, जिससे जेल प्रशासन के लिए इसे सेंसर करना मुश्किल हो जाता है।


कोर्ट का अंतिम निर्णय

कोर्ट ने कहा कि आवेदक को किताबें उपलब्ध कराने में कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री पर कोर्ट का कोई नियंत्रण नहीं होगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि केवल जेल प्रशासन ही आवेदक द्वारा सामग्री के उपयोग पर नियंत्रण रख सकता है। शरजील इमाम UAPA के तहत 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साज़िश से जुड़े मामले में आरोपी हैं। हाल ही में, ट्रायल कोर्ट द्वारा ज़मानत नामंजूर किए जाने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।