दिल्ली कैबिनेट ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को दी मंजूरी

दिल्ली कैबिनेट ने प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे राजधानी में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि यह कदम छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा अपने शहर में ही उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। बिल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं, जैसे कि दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित करना और NEP 2020 के नियमों का पालन करना। इस बिल के पारित होने के बाद, दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के लिए रास्ता खुल जाएगा।
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दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ का रास्ता साफ़

दिल्ली कैबिनेट ने शुक्रवार को प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को स्वीकृति प्रदान की। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में इस बिल को मंजूरी दी गई है, जिससे राजधानी में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ की स्थापना की संभावनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने बताया कि कई वर्षों से दिल्ली के छात्र उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों या विदेशों का रुख करते हैं, जो कि महंगा साबित होता है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा अपने शहर में ही मिले।


बिल की विधानसभा में पेशी

सूद ने कहा कि कैबिनेट ने इस बिल को मंजूरी दे दी है और इसे जल्द ही दिल्ली विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। एक बार जब विधानसभा में इस पर चर्चा होगी और इसे पारित किया जाएगा, तो प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के लिए रास्ता खुल जाएगा। उन्होंने बताया कि NEP 2020 के लागू होने के बाद, दिल्ली सरकार इस नीति के अनुसार आगे बढ़ रही है और नई यूनिवर्सिटीज़ भी इसके नियमों का पालन करेंगी।


प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल की मुख्य बातें

- प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए ज़मीन की खरीद स्वयं करनी होगी; सरकार ज़मीन उपलब्ध नहीं कराएगी।


- दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित होंगी।


- सरकार फीस पर निगरानी रखेगी और एक रेगुलेटरी कमेटी का गठन करेगी।


- NEP के नियमों का पालन अनिवार्य होगा।


प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए आवश्यक शर्तें

- स्पॉन्सरिंग संस्था के पास ज़मीन होनी चाहिए या कम से कम 30 साल के लिए लीज़ पर ज़मीन होनी चाहिए।


- एकेडमिक बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और छात्रों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।


- फैकल्टी और अन्य शैक्षणिक स्टाफ़ की नियुक्ति UGC के मानकों के अनुसार करनी होगी।


दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षण

- हर कोर्स में दिल्ली के छात्रों के लिए 25% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।


- इन सीटों पर दाखिला GNCTD की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार होगा।


सरकार की निगरानी

- उच्च शिक्षा मंत्री यूनिवर्सिटी के 'विज़िटर' होंगे।


- विज़िटर को जानकारी मांगने, निरीक्षण का आदेश देने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में निर्देश जारी करने का अधिकार होगा।


- आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक, शैक्षणिक और वित्तीय मामलों की जांच की जा सकती है।